दूसरों की मेहनत की कमाई हड़पी तो क्या होगा अंजाम ? शास्त्रों में लिखी है कठोर सजा

punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 02:31 PM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

मानव जीवन में धर्म और कर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर श्रीमद्भगवद्गीता, मनुस्मृति और गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि किसी व्यक्ति का हक मारना या उसकी मेहनत की कमाई को छल-बल से हड़पना सबसे बड़े पापों में से एक है। आज के भौतिकवादी युग में लोग थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए दूसरों को धोखा देने या उनका शोषण करने से पीछे नहीं हटते। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, पराया धन कभी भी सुख नहीं देता। आइए विस्तार से जानते हैं कि शास्त्रों में इसके लिए क्या परिणाम और सजाएं बताई गई हैं।

Inspirational Context

अन्यायोपार्जितं वित्तं: 

चाणक्य नीति और अन्य शास्त्रों में एक प्रसिद्ध श्लोक है:
अन्यायोपार्जितं वित्तं दश वर्षाणि तिष्ठति। प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं तद् विनश्यति।।

इसका अर्थ है कि अन्याय से कमाया गया धन अधिकतम दस वर्षों तक ही टिकता है। ग्यारहवें वर्ष के आते ही वह धन अपने मूल (असली कमाई) के साथ भी नष्ट हो जाता है। यानी जब गलत तरीके से आया पैसा जाता है, तो वह व्यक्ति की अपनी मेहनत की जमा-पूंजी भी साथ ले जाता है।

गरुड़ पुराण में वर्णित भयानक सजाएं
गरुड़ पुराण में यमलोक और वहां मिलने वाली यातनाओं का विस्तृत वर्णन है। जो लोग दूसरों की संपत्ति या मेहनत का पैसा हड़पते हैं, उनके लिए विशेष सजाएं निर्धारित हैं:

जो व्यक्ति अपने परिवार को पालने के नाम पर दूसरों का हक मारता है, उसे 'रौरव नरक' में डाला जाता है। यहां उसे वही लोग सांप और बिच्छू बनकर डसते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी की गाढ़ी कमाई को धोखे से छीनता है, तो उसे खौलते हुए तेल के कड़ाहों में डाल दिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, छल से लिया गया धन परलोक में अग्नि के समान कष्ट देता है।

Inspirational Context

मानसिक अशांति और पारिवारिक कष्ट
शास्त्रों का मानना है कि धन केवल एक मुद्रा नहीं है, बल्कि उसके साथ तरंगें भी आती हैं। जब आप किसी की मेहनत का पैसा छीनते हैं, तो उसके साथ उस व्यक्ति की आह और निराशा भी आती है। माना जाता है कि अधर्म से कमाया गया पैसा घर में बीमारियां और कलह लाता है। ऐसी कमाई का सबसे बुरा प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। संतान कुमार्गी हो जाती है या परिवार में अकाल मृत्यु का भय बना रहता है। अनैतिक धन से आप भौतिक सुख तो खरीद सकते हैं, लेकिन 'नींद' और 'शांति' नहीं। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा व्यक्ति हमेशा भय और असुरक्षा के साये में जीता है।

कर्मफल का सिद्धांत: 
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि कर्म का फल व्यक्ति को इसी जन्म में या अगले जन्म में भोगना ही पड़ता है।

जो लोग मजदूरों की मजदूरी रोकते हैं या किसी का हिस्सा डकार जाते हैं, वे अगले जन्मों में अत्यंत दरिद्र कुल में जन्म लेते हैं और जीवनभर दूसरों की सेवा करने के बाद भी भूखे रहते हैं। एक आध्यात्मिक मान्यता यह भी है कि यदि आप इस जन्म में किसी का पैसा हड़पते हैं, तो अगले जन्म में आपको वह धन ब्याज सहित किसी न किसी रूप में  चुकाना ही पड़ता है।

Inspirational Context


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Prachi Sharma

Related News