Flat Kitchen Vastu : गलत दिशा में बनी रसोई बन सकती है परेशानी की वजह, रिश्ते और पैसा दोनों होंगे प्रभावित

punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 01:06 PM (IST)

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Flat Kitchen Vastu : वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यह केवल भोजन बनाने की जगह नहीं बल्कि ऊर्जा का मुख्य केंद्र है। फ्लैट संस्कृति में अक्सर जगह की कमी के कारण रसोई का निर्माण सही दिशा में नहीं हो पाता, जिसका सीधा असर परिवार के स्वास्थ्य, रिश्तों और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि फ्लैट में रसोई के वास्तु नियम क्या हैं और गलत दिशा के क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

Flat Kitchen Vastu

रसोई की सबसे शुभ दिशा: 
वास्तु के अनुसार, रसोई के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण-पूर्व है, जिसे आग्नेय कोण कहा जाता है। इस दिशा का स्वामी अग्नि देव हैं और शुक्र ग्रह का यहां आधिपत्य होता है। यदि रसोई यहां स्थित है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और धन की आवक बनी रहती है। आग्नेय कोण की अग्नि भोजन को सात्विक और पौष्टिक बनाने में मदद करती है।

गलत दिशाओं का प्रभाव और परेशानियां

उत्तर-पूर्व दिशा का दोष
ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व में रसोई का होना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। यह दिशा देवताओं और जल तत्व की मानी जाती है। यहां आग जलाना मानसिक शांति को पूरी तरह भंग कर देता है। इसके प्रभाव से परिवार में भारी आर्थिक नुकसान होता है और घर के मुखिया को मानसिक तनाव या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

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उत्तर दिशा में रसोई
उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। यहाँ रसोई होने से व्यापार में घाटा और करियर में रुकावटें आती हैं। माना जाता है कि उत्तर की अग्नि धन के अवसरों को जला देती है, जिससे पैसा पानी की तरह बहने लगता है और संचय नहीं हो पाता।

दक्षिण-पश्चिम दिशा और रिश्ते
इस दिशा में रसोई होने से घर के सदस्यों के बीच कलह और असुरक्षा की भावना पैदा होती है। यह दिशा स्थायित्व की है और यहां की अग्नि रिश्तों में स्थिरता खत्म कर देती है। विशेषकर पति-पत्नी के बीच अनावश्यक झगड़े और अलगाव की स्थिति बन सकती है।

रसोई के अंदर वस्तुओं का सही प्रबंधन

गैस चूल्हा : चूल्हा हमेशा रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने में होना चाहिए। खाना बनाते समय गृहिणी का चेहरा पूर्व दिशा की ओर होना सबसे शुभ माना जाता है। इससे स्वास्थ्य बेहतर रहता है और भोजन में सकारात्मकता आती है।

पानी और सिंक: पानी का काम उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। वास्तु का एक सख्त नियम है कि अग्नि और जल को कभी पास नहीं रखना चाहिए। चूल्हा और सिंक एक ही प्लेटफार्म पर पास-पास होने से घर में कलह बढ़ती है। इनके बीच कम से कम 2-3 फीट की दूरी रखें।

बिजली के उपकरण: रेफ्रिजरेटर, माइक्रोवेव और टोस्टर जैसे उपकरण दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना श्रेष्ठ है। इन्हें कभी भी उत्तर-पूर्व दिशा में न रखें, क्योंकि इससे उनकी उम्र कम होती है और वे बार-बार खराब होकर खर्च बढ़ाते हैं।

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Content Editor

Prachi Sharma

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