36 साल से जल रही अखंड आस्था की ज्योति ! बाढ़-बारिश और ठंड भी नहीं डिगा सकीं देवरहा बाबा के मचान की परंपरा
punjabkesari.in Thursday, Jan 08, 2026 - 11:16 AM (IST)
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Devaraha Baba : सुनने में भले ही आश्चर्य लगे, लेकिन यह स्थान देवरहा बाबा की साधना भूमि है, जहां श्रद्धा की अखंड लौ बीते करीब चार दशकों से निरंतर प्रज्वलित है। मेला क्षेत्र में स्थापित यह श्रीराम नाम की अखंड ज्योति वर्ष 1989 से लगातार जल रही है। इसकी स्थापना स्वयं देवरहा बाबा ने की थी। गंगा किनारे स्थित यह ज्योति दिन-रात जलती रहती है और सबसे खास बात यह है कि भीषण बाढ़ के समय भी यह लौ बुझती नहीं। उफनती गंगा के बीच जमीन से लगभग 50 फीट की ऊंचाई पर यूकेलिप्टस की लकड़ी पर यह अखंड ज्योति धर्म और अध्यात्म का संदेश देती रहती है।
घास-फूस से बना बाबा का मचान
अखंड ज्योति के चारों ओर धार्मिक ध्वजाएं हमेशा लहराती रहती हैं। इसके ठीक सामने देवरहा बाबा का मचान स्थित है, जो जमीन से करीब 30 फीट ऊंचा है और घास-फूस से बनाया गया है। यही मचान बाबा की साधना और तपस्या का प्रमुख केंद्र रहा है।
मचान पर आज भी विराजमान हैं बाबा
भले ही देवरहा बाबा अब इस संसार में नहीं हैं, लेकिन उनके मचान पर आज भी उनकी प्रतिमा स्थापित है। इस अखंड ज्योति और मचान की देखरेख उनके शिष्य महंत रामदास करते हैं, जो प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
1989 से नहीं बुझी आस्था की लौ
महंत रामदास के अनुसार, वर्ष 1989 में जब राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था, तब भक्तों ने देवरहा बाबा से पूछा था कि अयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा। इसी समय बाबा ने इस अखंड ज्योति की स्थापना कर यह विश्वास दिलाया था कि प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर अवश्य बनेगा। तब से यह ज्योति बिना रुके 24 घंटे जल रही है।
तिल के तेल से प्रज्वलित होती है ज्योति
महंत रामदास बताते हैं कि इस अखंड ज्योति में तिल के तेल का उपयोग किया जाता है। देवरहा बाबा दिगंबर अवस्था में रहते थे और इसी मचान से भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते थे। यही कारण है कि अखंड ज्योति के ठीक सामने उनका मचान आज भी स्थापित है।
आज भी आस्था का केंद्र
देवरहा बाबा भले ही शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनके द्वारा प्रज्वलित यह अखंड ज्योति आज भी लोगों को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। झूंसी शास्त्री पुल के ठीक नीचे स्थित यह चमत्कारी मचान आज भी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पुल से गुजरने वाले लोग भी इसे देखकर श्रद्धा से शीश झुका लेते हैं।
