चाणक्य से जानिए, क्यों सुंदरता से नहीं, बुद्धि से बनती है इंसान की असली कीमत

punjabkesari.in Monday, May 25, 2026 - 02:08 PM (IST)

Chanakya Niti : सम्राट चंद्रगुप्त देखने में बड़े सुंदर थे, जबकि आचार्य चाणक्य कुरूप। एक बार दोनों किसी मसले पर तर्क-वितर्क कर रहे थे। चंद्रगुप्त ने अचानक प्रसंग बदलते हुए कहा, “राज्य के सभी लोग आपकी विद्ववता और सूझबूझ का लोहा मानते हैं। लेकिन यदि भगवान ने आपको सुंदर बनाया होता तो कितना अच्छा होता। चाणक्य समझ गए कि चंद्रगुप्त को अपने रूप का अभिमान हो गया है।

Chanakya Niti 

चाणक्य ने सोचा कि इसका जवाब दिया जाए। चंद्रगुप्त को हमेशा पीने के लिए पानी स्वर्ण पात्र में दिया जाता था। चाणक्य ने एक सेवक से मिट्टी के बर्तन और स्वर्ण पात्र दोनों में अलग-अलग जल लाने को कहा। सेवक ने दोनों पात्रों में जल भर कर रख दिया। थोड़ी देर बाद चंद्रगुप्त को प्यास लगी। चाणक्य ने मिट्टी के बर्तन वाला जल पीने के लिए बढ़ा दिया।

पानी पीने के बाद चंद्रगुप्त ने पूछा, “आज पानी का स्वाद बदला हुआ है, ऐसा क्यों?

Chanakya Niti 

‘‘चाणक्य ने कहा, “क्षमा करें, भूल से आपको मिट्टी के बर्तन वाला जल पेश कर दिया गया।’’ उन्होंने तुरंत स्वर्ण पात्र का जल आगे बढ़ाया। चंद्रगुप्त ने उसे भी पिया। चाणक्य ने पूछा, “राजन, इन दोनों पात्रों के जल में बेहतर कौन सा था।” 

चंद्रगुप्त ने कहा, “ मिट्टी के पात्र का जल बहुत मीठा और ठंडा था। अब हमेशा उसी पात्र में मुझे जल दिया जाए।”

चाणक्य बोले, “राजन, जिस प्रकार पात्र की सुंदरता जल को शीतल और मीठा नहीं बनाती, वैसे ही शरीर की सुंदरता व्यक्ति को ज्ञानी और विद्वान नहीं बना देती। सुंदरता या कुरूपता से  ज्ञान का आकलन करना उचित नहीं होता।’’ चंद्रगुप्त उनका आशय समझ गए। उन्होंने चाणक्य से क्षमा मांगी।

Chanakya Niti 

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Content Editor

Sarita Thapa

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