Chaitra Navratri Ghatasthapana 2026: नवदुर्गा को प्रसन्न करने के लिए इस शास्त्रीय विधि से करें घटस्थापना, पढ़ें मुहूर्त और विधि
punjabkesari.in Wednesday, Mar 18, 2026 - 03:35 PM (IST)
Chaitra Navratri Ghatasthapana 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में कुल 4 नवरात्रि आती है, जिसमें से दो गुप्त नवरात्रि, तीसरी चैत्र नवरात्रि और चौथी शारदीय नवरात्रि होती है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाते हैं। इसके साथ ही हिंदू नववर्ष भी आरंभ हो जाता है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करने के साथ व्रत रखा जाता है। इसके साथ ही व्रती लोग पूरे नौ दिनों के लिए कलश स्थापना भी करते हैं और दशमी तिथि को व्रत का पारण करते हैं।

Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Muhurat चैत्र नवरात्र 2026 घटस्थापना मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर इस साल घटस्थापना 19 मार्च को ही की जाएगी। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इन दोनों में से किसी भी समय पर घटस्थापना कर सकते हैं।
Kalash Sthapana Vidhi कलश स्थापना की
कलश को सभी देवी-देवताओं और पवित्र तीर्थों का प्रतीक माना जाता है। इसके लिए मिट्टी या तांबे का कलश लेकर उसमें साफ पानी या गंगाजल भरें। फिर कलश के गले में मौली या कलावा बांधें और उसके सामने रोली या कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। इसके बाद कलश के ऊपर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें। अब एक नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलावा बांधें और उसे पत्तों के बीच इस तरह रखें कि नारियल का मुख ऊपर की ओर रहे। इसके बाद इस कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित कर दें।

इन देव-देवताओं का करें स्मरण
घटस्थापना करने के बाद पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा और अन्य देव शक्तियों का आह्वान किया जाता है। भक्त प्रार्थना करते हैं कि मां दुर्गा नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक इस कलश में विराजमान रहें और अपने भक्तों को आशीर्वाद दें।
कलश पूजन की प्रक्रिया
कलश स्थापना के बाद उसकी विधिवत पूजा की जाती है। इसके लिए कलश पर तिलक लगाकर अक्षत और फूल अर्पित किए जाते हैं. इसके साथ ही फल, मिठाई और प्रसाद भी चढ़ाया जाता है। पूजा के अंत में धूप-दीप जलाकर मां दुर्गा को सुगंधित इत्र और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
घटस्थापना के लिए कलश को ऐसे करें तैयार
नवरात्र में कलश को सृष्टि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना के लिए आमतौर पर मिट्टी का चौड़े मुंह वाला बर्तन लिया जाता है। सबसे पहले उस बर्तन में साफ मिट्टी की एक परत बिछाई जाती है और उसके ऊपर जौ के कुछ दाने डाले जाते हैं। फिर दोबारा मिट्टी डालकर जौ छिड़कते हैं और अंत में इसे हल्की मिट्टी से ढक दिया जाता है। इसके बाद इस मिट्टी पर थोड़ा सा जल छिड़क दिया जाता है, जिससे जौ अंकुरित हो सकें।

किस वाहन पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा
शशिसूर्ये गजारूढ़ा , शनिभौमे तुरंगमे ।
गुरुशुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता ।।
फलम् – गजे च जलदा देवी , छत्रभङ्ग तुरंगमे ।
नौकायां सर्व सिद्धिस्यात् दोलायां मरणं धुव्रम् ।।
श्रीमददेवी भागवत महापुराण के इस श्लोक के अनुसार, मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान किस वाहन के साथ करेंगी। इसका निर्धारण सप्ताह के दिन के हिसाब से किया जाता है। इस श्लोक का अर्थ है कि यदि नवरात्रि की प्रतिपदा सोमवार या रविवार को हो, तो मां दुर्गा गज (हाथी) पर आरूढ़ होती हैं। अगर नवरात्रि शनिवार या मंगलवार को पड़े, तो माता घोड़े पर सवार मानी जाती हैं। यदि प्रतिपदा गुरुवार या शुक्रवार को हो, तो माता डोली (पालकी) पर आती हैं और यदि यह दिन बुधवार को हो, तो माता दुर्गा नौका (कश्ती) पर आरूढ़ होती हैं।
इस साल चैत्र नवरात्रि गुरुवार के दिन से आरंभ हो रहा है, तो मां पालकी में सवार होकर आने वाली है। इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता है। मां दुर्गा का इस वाहन में आने का मतलब है कि कई परेशानियां और चुनौतियां लेकर आना।
आचार्य पंडित सुधांशु तिवारी
प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ/ ज्योतिषाचार्य
संपर्क सूत्र 9005804317

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