Chaitra Navratri 2026 Day 4: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन इस विधि से करें मां कुष्मांडा की पूजा और पढ़ें कथा
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 01:30 PM (IST)
Chaitra Navratri 2026 Day 4: चैत्र नवरात्र के चौथे दिन दुर्गा जी के चौथे रूप मां कुष्मांडा देवी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इन्होने ब्रह्मांड की रचना की। जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था और कोई भी जीव-जंतु नहीं था। तब मां ने सृष्टि का रचना की। इसी कारण इन्हें कुष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। आदिशक्ति दुर्गा के कुष्माण्डा रूप में चौथा स्वरूप भक्तों को संतति सुख प्रदान करने वाला है।

कुष्माण्डा का मतलब है कि अपनी मंद (फूलों) सी मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड को अपने गर्भ में उत्पन्न किया है, वही है मां कुष्माण्डा है। मां कुष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। मां कुष्माण्डा सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं। इनकी आराधना करने से भक्तों को तेज, ज्ञान, प्रेम, ऊर्जा, वर्चस्व, आयु, यश, बल, आरोग्य और संतान का सुख प्राप्त होता है।
मां कूष्मांडा का ऐसा है स्वरूप
देवी मां की 8 भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा नजर आता है, जबकि आठवें हाथ में जप की माला रहती है। माता का वाहन सिंह है और इनका निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है, तो आज मां कूष्मांडा की उपासना करना आपके लिये बड़ा ही फलदायी होगा। आज आपको देवी मां के इस मंत्र का 21 बार जप करना चाहिए।
मंत्र इस प्रकार है- सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्त पद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥
आज मां कूष्मांडा के इस मंत्र का जप करने से आपके परिवार में खुशहाली आएगी और आपके यश तथा बल में बढ़ोत्तरी होगी। इसके अलावा आपकी आयु में वृद्धि होगी और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहेगा।
देवी कुष्माण्डा की पूजा विधि और लाभ
नवरात्र के चौथे दिन हरे वस्त्र धारण करके मां कुष्माण्डा का पूजन करें। पूजा के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ या कुम्हड़ा अर्पित करें। इसके बाद उनके मुख्य मंत्र "ॐ कुष्मांडा देव्यै नमः" का 108 बार जाप करें चाहें तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।

बुध को मजबूत करने के लिए करें मां कुष्मांडा की पूजा
मां कुष्माण्डा को उतनी हरी इलायची अर्पित करें, जितनी कि आपकी उम्र है। हर इलायची अर्पित करने के साथ "ॐ बुं बुधाय नमः" कहें। सारी इलायची को एकत्र करके हरे कपड़े में बांधकर रख लें। इन्हें अपने पास अगली नवरात्रि तक सुरक्षित रखें
मां कुष्माण्डा का विशेष प्रसाद
इस दिन मां को आज के दिन मालपुए का भोग लगाएं। इसके बाद उसको किसी ब्राह्मण या निर्धन को दान कर दें। इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता अच्छी हो जाती है। आप चाहें तो देवी को पीले रंग की मिठाई या फल का भी भोग लगा सकते हैं।
मां कुष्मांडा पूजा का महत्व
विशेष रूप से माना जाता है कि मां की कृपा से भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। देवी कुष्मांडा रोगों का नाश करने वाली और आयु में वृद्धि करने वाली मानी जाती हैं। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों के सभी रोग, दुख और कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
इनकी पूजा से आयु, यश, बल और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इनके पूजन से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और मनुष्य की आरोग्यता बनी रहती है। मां कुष्मांडा की आराधना से जीवन में सभी प्रकार की समृद्धि और सुख-शांति का प्रवेश होता है, नवरात्र उपासना में चौथे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है।
आचार्य पंडित सुधांशु तिवारी
प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ/ ज्योतिषाचार्य
9005804317

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
