प्रधानमंत्री मोदी से कैप्टन स्मित मच्छार ने की 9 मिनट बात, बोले हनुमान चालीसा का पाठ करता रहा, भगवान ने बचाया

punjabkesari.in Saturday, Oct 03, 2026 - 08:26 AM (IST)

नई दिल्ली (एजैंसी): ‘फ्लाईदुबई’ के कैप्टन स्मित मच्छार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा कि उन्होंने ठान लिया था कि वह दूसरों की जान नहीं जाने देंगे और हवा में सह-पायलट के हमले में घायल होने के बाद हिम्मत नहीं हारी और उनमें जितनी भी ताकत बची थी, उसी के सहारे उन्होंने विमान को सुरक्षित बचा लिया। मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यू.ए.ई.) के एक अस्पताल में भर्ती मच्छार से फोन पर बात की। 

बुधवार को यू.ए.ई. के दुबई से इसराईल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजैड1073 के कॉकपिट में सह-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस उड़ान में 27 बच्चों समेत 174 लोग सवार थे। मच्छार ने वीडियो कॉल पर प्रधानमंत्री को घटना के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि जब भी वह संकट में होते हैं, तो वह ‘हनुमान चालीसा’ का  पाठ  करते  हैं।  उन्होंने  कहा, ‘मैं घायल हालत में (कॉकपिट के) फर्श पर पड़ा था। मेरे अंदर जितनी भी ताकत बची थी, मैंने सही कदम उठाया और विमान को सुरक्षित बचा लिया।’ 

मच्छार ने कहा, ‘मैं अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहा था, लेकिन साथ ही मैंने ठान लिया था कि मैं दूसरों को नहीं मरने दूंगा। वह बहुत अहम पल था। मैं आंखें बंद करके भी सोच सकता हूं कि विमान में क्या हो रहा था। उस पल मुझे एहसास हुआ कि विमान नीचे गिर रहा है। मुझे कई चोटें आई थीं। मैं बुरी तरह घायल था, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना होगा और कुछ करना होगा। उस समय, मैंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए पूरी ताकत लगाई। दूसरे लोगों की भूमिका भी उतनी ही अहम थी।’ 

वीडियो कॉल के दौरान मच्छार अस्पताल में बिस्तर पर थे और उनके सिर पर पट्टी बंधी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी, सूझबूझ और असीम धैर्य की जमकर सराहना करते हुए कहा कि हिंदुस्तानी दूसरों की जान लेने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि वे दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को तैयार रहते हैं। 

मोदी ने वीडियो कॉल के दौरान कहा, ‘देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले नहीं, बल्कि दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को जोखिम में डालने वाले लोग हैं। आप अपने शरीर पर इतने घाव झेल रहे थे और स्वयं जीवन-मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे, उस समय भी आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, सभी यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है। इसीलिए मैं हदय से गर्व अनुभव कर रहा हूं।” 

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Content Editor

Sarita Thapa

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