Bhadrapad Guru Pradosh 2026: रवि और धृति योग में रखा जाएगा भाद्रपद का अंतिम प्रदोष व्रत, जानिए किस मुहूर्त में पूजा करने से होगी कार्य सिद्धि
punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 01:14 PM (IST)
Bhadrapad Guru Pradosh vrat 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है। प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखने का विधान है। इस बार भाद्रपद महीने का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जिस कारण इसे 'गुरु प्रदोष व्रत' कहा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में की गई शिव पूजा से साधक के जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हर प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल अर्थात सांझ ढलने के बाद भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। त्रयोदशी तिथि में रात्रि के प्रथम प्रहर पर जो भक्त प्रेम और श्रद्धा से शिवलिंग का दर्शन करता है और उनके लिए प्रेम भरी भेंट लेकर जाता है। भोले बाबा उससे बहुत प्रसन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त अपनी बड़ी-बड़ी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सूर्योदय के बाद कुछ छोटे-छोटे उपाय करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।
When is the second Pradosh Vrat of Bhadrapada? कब है भाद्रपद का दूसरा प्रदोष व्रत?
पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर 2026 की रात 10 बजकर 50 मिनट पर प्रारंभ होगी। वहीं, त्रयोदशी तिथि का समापन 24 सितंबर 2026 की रात 11 बजकर 18 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत का पूजन उदया तिथि के बजाय शाम के समय यानी 'प्रदोष काल' में किया जाता है। 24 सितंबर को प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए भाद्रपद माह का अंतिम प्रदोष व्रत 24 सितंबर 2026, गुरुवार को ही रखा जाएगा।
Shubh yoga on Bhadrapad Guru Pradosh vrat 24 सितंबर को बन रहे हैं 2 अति दुर्लभ शुभ योग
इस बार गुरु प्रदोष व्रत के दिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से 2 विशेष शुभ योगों का निर्माण हो रहा है:
रवि योग: 24 सितंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 25 सितंबर की सुबह 6 बजकर 11 मिनट तक रवि योग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि योग में किए गए कार्यों से बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है।
धृति योग: 24 सितंबर को सुबह से लेकर दोपहर 3 बजकर 55 मिनट तक धृति योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में धृति योग को कार्यों में स्थायित्व और सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है।

Pradosh Vrat Shiva Worship Rituals प्रदोष व्रत शिव पूजा विधि:
सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल या जल चढ़ाएं।
फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं।
पुनः गंगाजल से शुद्ध जल स्नान कराएं।
बेलपत्र (त्रिदल), हर पत्ती पर “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए चढ़ाएं।
फिर सफेद चंदन, भस्म, फूल, धतूरा, भांग, और फल अर्पित करें।
धूप-दीप जलाएं।

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