जब धन से बड़ी दुआएं बन गईं ! जानिए फ्रैंकलिन और उनके मित्र के बीच हुए उस गोपनीय समझौते का सच
punjabkesari.in Thursday, Mar 19, 2026 - 01:38 PM (IST)
Benjamin Franklin Story : बैंजामिन फ्रैंकलिन ने अपने एक धनी मित्र की मेज पर सोने की कुछ गिन्नियां रखते हुए कहा, “यह लीजिए अपनी रकम वापस।" धनी मित्र ने पूछा यह क्या है ?
फ्रैंकलिन ने कहा, "मैंने जो रकम आपसे ली थी, वह वापस कर रहा हूं और क्या ?" धनी मित्र को कुछ याद नहीं था।
फ्रैंकलिन ने बताया, "मैंने एक प्रैस में समाचार-पत्र छापने का काम प्रारंभ किया था, अचानक ही अस्वस्थ हो जाने से मेरा काम ठप्प हो गया था और उस समय मैंने आप से यह रकम ली थी। अब वह राशि लौटाने आया हूं। आप ने समय पर जो सहायता की, उसका परिणाम यह हुआ कि अखबार दोबारा प्रकाशित हो रहा है। मैं ही उसका संपादकीय कार्य करता हूं। ग्राहकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। आर्थिक दृष्टि से मैं अब निश्चित हूं। अपनी इन गिन्नियों को आप संभाल लें।
बैंजामिन ने जब विस्तार से स्थिति स्पष्ट की तो उसे याद आ गया। लेकिन उसने कहा, “यह तो ठीक है कि आप मुझसे राशि ले गए थे, परंतु उसे वापस लौटाना तो तय नहीं हुआ था। उस समय आप कठिनाई में थे, इसलिए आपकी सहायता करना मैंने अपना कर्त्तव्य समझा था। जब फ्रैंकलिन ने जोर दिया तो उनके मित्र ने कहा, “मेरी ओर से आप यह रकम आप अपने पास रखें। कभी कोई कष्ट में आपके पास आए तो यह उसे दे दें और उससे आप भी वापस न लें। वह भी इसे आगे किसी जरूरतमंद की सहायता के लिए दे दे। यह क्रम चलता रहे तो कितना अच्छा हो। कुछ सोचकर फ्रैंकलिन ने वे गिन्नियां अपने पास रख लीं और वैसा ही किया जैसा उसके मित्र ने कहा था।
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