Diwali 2020: कुछ ऐसा था अयोध्या का नजारा, जब श्री राम 14 वर्ष बाद लौटे

2020-11-14T11:14:46.897

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Deepavali 2020: दीपावली पर्व की यह विलक्षणता है कि इसके साथ धनतेरस, नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली और गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पर्व जुड़े हैं। धनतेरस के दिन वैद्यराज धनवंतरि एवं यमराज के निमित्त घर के मुख्य द्वार पर दीप प्रज्वलित कर आरोग्य एवं दीर्घायु की कामना की जाती है। इसी प्रकार नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान करने से नरक का तथा अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। घर परिवार में खुशहाली एवं धन समृद्धि की निरंतर वृद्धि होती है।

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Diwali 2020: इनमें दीपावली पर्व सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। घर के मुख्य द्वार तथा मंदिर में जाकर दीपदान करने का विधान है। जो मनुष्य भक्तिपूर्व दीपावली पर्व के दौरान भगवान के निमित्त दीपदान करता है वह श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त करता है।

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Deepotsav: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम दीपावली के दिन चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापस लौटे तब अयोध्या वासियों ने अपने प्रभु के आगमन पर दीपमाला की। जब आनंदकंद भगवान प्रभु श्री राम अपने महल की ओर जा रहे थे तो सम्पूर्ण आकाश फूलों की वर्षा से ढंक गया।

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Ayodhya Deepotsav: नगर के स्त्री पुरुषों ने सोने के कलशों को स्वर्ण माणिक्य से विभिन्न रीति से अलंकृत कर अपने-अपने द्वार पर रख दिया। अयोध्यावासियों ने मंगल के लिए वंदनवार, ध्वजा और पताकाएं लगाईं।

Ayodhya Ram Mandir: महिलाओं ने सोने के थालों में दीपक आरती सजा कर मंगलगान किया। अयोध्या की अद्भुत छटा का दर्शन करने के लिए देवलोक पृथ्वी पर पधारा। सम्पूर्ण वेद उपनिषद, पुराण, नीति, ग्रंथ, स्मृति संहिता, महाभारत रामायण, राम चरित मानस आदि सभी धर्म ग्रंथों में भगवान श्री राम के ब्रह्म स्वरूप की महिमा का निरूपण किया गया है।

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Niyati Bhandari

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