Astrology: 7 ग्रह दे रहे हैं शुभ फल, बना है विलक्षण संयोग

2020-09-25T11:53:06.737

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Astrological prediction: ज्योतिष में कई बार ग्रह अद्भुत संयोग बनाते हैं। कभी कुछ ग्रह वक्री हो जाते हैं यानी उल्टी चाल चलने लगते हैं तो कभी कुछ ग्रह मार्गी हो जाते हैं यानी शुभ स्थिति में आ जाते हैं । यही नहीं, ग्रह अपनी राशि में बदलते रहते हैं। सौरमंडल में ग्रहों का खेल चलता रहता है और ग्रहों के इस खेल से हमारी जिंदगी भी प्रभावित होती है। हम अच्छे और बुरे वक्त के दौर से गुजरते हैं। उपलब्धियों के दौर से भी गुजरते हैं और संघर्ष के दौर से भी गुजरते हैं। कई बार हम कहते हैं कि ग्रह नक्षत्र हमारे ठीक नहीं चल रहे तो कई बार हम किसी व्यक्ति के बारे में यह कहते हैं कि उसके सितारे ही उसे कामयाब बना रहे हैं।

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इस समय सौरमंडल में ग्रहों का एक बहुत ही सुखद संयोग बना है। ज्योतिष में नौ ग्रहों को मान्यता दी गई है, जो हमारे जीवन पर असर डालते हैं और 9 ग्रहों में से 7 ग्रह इस समय गोचर में बहुत ही अच्छी स्थिति में हैं। ग्रहों का गोचर में अच्छी स्थिति में होना हममें से बहुत से लोगों के लिए बहुत ही अच्छा रहने वाला है। देश के लिए भी अच्छा रहने वाला है।

सबसे पहले हम देव गुरु बृहस्पति से ही बात शुरू करते हैं जो 13 सितंबर को अपनी धनु राशि में मार्गी हो चुके हैं यानी शुभ स्थिति में आ चुके हैं और अपना शुभ प्रभाव दे रहे हैं। देव गुरु बृहस्पति हमारे आध्यात्मिक ज्ञान और  हमारी जिंदगी में सफलताओं के सूचक होते हैं। लिहाजा देव गुरु की इस स्थिति से हम अपने भीतर पॉजिटिव एनर्जी महसूस करेंगे।

मंगल ग्रह जिसे नवग्रहों में सेनापति का दर्जा हासिल है, भले ही वक्री हैं लेकिन अपनी मेष राशि में हैं और उद्योग जगत के लिए बहुत शुभ स्थिति में हैं।

शनि ग्रह जिन्हें न्याय का देवता माना जाता है, भले ही वक्री हैं लेकिन अपनी ही मकर राशि में हैं। अपनी राशि में हमेशा शनि मजबूत स्थिति में रहते हैं। इसी महीने 29 सितंबर को वह मार्गी भी हो रहे हैं और उनके मार्गी होते ही कई गतिरोध टूटेंगे। कई राशियों पर उसका बहुत ही अच्छा असर पड़ेगा। शनिदेव को सामाजिक व्यवस्था का कारक माना जाता है, उन्हें विधि-विधान का कार्य भी माना जाता है और उनके मार्गी होते ही न्याय के क्षेत्र में और उद्योग के क्षेत्र में और क्रियाशीलता बढ़ेगी।

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राहु और केतु भी 23 सितंबर को अपनी राशि बदल चुके हैं। इन दोनों ग्रहों की अपनी तो कोई राशि नहीं है लेकिन आमतौर पर राहु को मिथुन राशि में उच्च का और केतु को धनु राशि में उसका माना जाता है। महर्षि पराशर ने जो ज्योतिष के प्रकांड ज्ञाता थे, उन्होंने राहु को वृषभ राशि में और केतु को वृश्चिक राशि में उच्च का बताया था। अभी भी बहुत से ज्योतिर्विद वृषभ राशि को राहु की और वृश्चिक राशि को केतु की उच्च राशि मानते हैं।

अब हम सूर्य की बात करते हैं, जिन्हें ज्योतिष में देवता का दर्जा भी हासिल है और जिन्हें हमारी आत्मा का कारक माना गया है। पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक माना गया है। रोशनी का पर्याय माना गया है। ज्योतिष में सूर्य को पिता का दर्जा भी हासिल है और अभी 16 सितंबर पर सूर्य अपने मित्र बुध की कन्या राशि में गोचर कर रहे हैं। सूर्य का मित्र राशि में गोचर करना भी ज्योतिष में बहुत शुभ माना गया है।

सातवें ग्रह में बुध। बुध को नवग्रहों में राजकुमार कहा गया है। यह हमारे बुद्धि के कारक हैं।  व्यापार के कारक हैं। बुध की शुक्र के साथ मित्रता है। शुक्र के साथ बुध हमेशा कंफर्टेबल महसूस करते हैं। इन्हीं शुक्र की तुला राशि में आजकल बुध ग्रह गोचर कर रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान में नए अनुसंधान सामने आएंगे और रिसर्च वर्क से जुड़े लोगों को काफी सफलता मिलने के योग बन गए हैं। अर्थव्यवस्था में भी सुधार देखने को मिलेगा और आने वाले दिनों में इसके परिणाम सामने आएंगे।

 सभी 12 राशियां इन सातों ग्रहों के शुभ स्थिति में होने से प्रभावित होंगी। सात ग्रहों की इस शुभ स्थिति से 7 राशियों मेष,  वृषभ , कन्या,  तुला,  धनु,  मकर और मीन राशि वालों के लिए खास तौर पर ग्रहों की स्थिति काफी लाभ देने वाली हैं।

गुरमीत बेदी
gurmitbedi@gmail.com

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Niyati Bhandari

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