कहां तक जाएगा ट्रम्प का विस्तारवाद
punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 06:12 AM (IST)
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को अपनी दूसरी टर्म का पहला साल पूरा करेंगे। ट्रम्प की दूसरी टर्म की विदेश नीति, जो जनवरी 2025 में शुरू हुई थी, अमरीका के पारंपरिक दृष्टिकोण से काफी अलग है, यहां तक कि उनकी पहली टर्म से भी। उनकी विदेश नीति के काम, जिनमें एग्रीमैंट से पीछे हटना और टैरिफ का इस्तेमाल करना शामिल हैं, एकतरफा सोच की ओर एक कदम को दिखाते हैं। ट्रम्प का नया तरीका ज्यादा परिवर्तनवादी है और इसने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बड़े बदलाव किए हैं। मुख्य बातों में मोनरो डॉक्ट्रिन के तहत पश्चिमी गोलाद्र्ध पर ज्यादा फोकस, यूरोपियन सहयोगियों के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और डैमोक्रेसी को बढ़ावा देने से लेकर ट्रांजैक्शनल डिप्लोमेसी की ओर बढऩा शामिल है, जो एक रणनीतिक पुननिर्माण ण का संकेत देता है।
जैसा कि सी.एन.एन. कहता है, ‘‘उन्होंने (ट्रम्प) यू.एस. एड जैसी एजैंसियों को बर्बाद कर दिया, हजारों यू.एस. एड वर्कर्स को निकाल दिया, अपने दुश्मनों पर सरकारी वकील लगा दिए और 6 जनवरी के दंगाइयों को माफी देकर न्याय का मजाक उड़ाया।’’इस दौरान, ट्रम्प की विदेश नीति में उनके पहले कार्यकाल से भी ज्यादा बड़े बदलाव हुए। ट्रम्प ने दुनिया को कई बार चौंकाया है, उनके अप्रत्याशित व्यवहार ने ग्लोबल अस्थिरता में योगदान दिया है। ट्रम्प के समर्थक उनके बातचीत करने के तरीके और अमरीकी हितों पर उनके जोर से खुश थे लेकिन उनके आलोचकों को डर था कि इन कामों से लंबे समय के साथी कमजोर हो सकते हैं। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की खासियत कार्यकारी अधिकार का तेजी से और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल है, जिससे उनकी बहुत ज्यादा ताकत का एहसास होता है।
ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (टी.पी.पी.) और पैरिस क्लाइमेट एग्रीमैंट जैसे मल्टीलैटरल एग्रीमैंट्स से ट्रम्प के हटने से ग्लोबल संस्थाओं में अमरीका के लंबे समय के असर और भरोसे को लेकर ङ्क्षचताएं पैदा होती हैं, जिससे भविष्य में लीडरशिप की भूमिकाएं प्रभावित होंगी। उन्होंने ऑफिस में अपने पहले हफ्ते में ही टी.पी.पी. ट्रेड डील से नाम वापस ले लिया। राष्ट्रपति पैरिस क्लाइमेट एग्रीमैंट से बाहर हो गए, इन कदमों ने उनके शक को उन अंतर्राष्ट्रीय फ्रेमवर्क की ओर मोड़ दिया, जिनके बारे में उनका मानना था कि वे अमरीकी संप्रभुता को रोकते हैं। ट्रम्प को गठबंधन पसंद नहीं हैं और वह यूरोपीय सहयोगियों को कमजोर मानते हैं।
इस साल, उन्होंने जेलेंस्की और पुतिन के साथ कई बार बात की और यूक्रेन में युद्ध रोकने की कोशिश के लिए अलास्का में पुतिन के साथ आमने-सामने मीटिंग भी की। यूक्रेन में युद्ध सुलझने की तरफ बढ़ रहा है लेकिन यह ट्रम्प की उम्मीद से कहीं ज्यादा धीरे हो रहा है क्योंकि पुतिन जिद्दी हैं। यूरोप के साथ रिश्ते खराब हो गए, जिससे डैमोक्रेसी को बढ़ावा देने की कोशिशों में रुकावट आई। पश्चिमी गोलाद्र्ध पर ज्यादा फोकस एक जरूरी पहलू है, जिससे चिंताएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एग्रीमैंट (एन.ए.एफ.टी.ए.) से हटने का फैसला किया। उन्होंने इसे फिर से बातचीत के लिए शुरू किया, जिसमें सोलर पैनल और वॉशिंग मशीन पर टैरिफ शामिल हैं। उन्होंने सहयोगियों के विरुद्ध टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल किया, गाजा से बंधकों को रिहा करवाया और वेनेजुएला सरकार के विरुद्ध दबाव बनाने का अभियान शुरू किया।
अमरीकी सैनिकों ने देश पर हमलों के बाद वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ लिया। मादुरो और उनकी पत्नी को अमरीका लाया गया है, जहां न्यूयॉर्क में उन पर ड्रग्स के आरोप लगाए गए हैं। पिछले साल दिसम्बर में जारी नैशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी ने ग्लोबल रिश्तों के लिए एक अलग रास्ता बताया। यह स्ट्रैटेजी लोकतंत्र को बढ़ावा देने से हटकर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है। इसने बड़े पैमाने पर माइग्रेशन को देशों द्वारा खड़ी की गई दूसरी ग्लोबल चुनौतियों से ऊपर एक गंभीर बाहरी खतरे के रूप में पहचाना। एक नया नजरिया सामने आया, जिससे पता चला कि अमरीका, रूस और चीन जैसे देश वैश्विक शक्ति को कैसे आकार देते हैं। इस नजरिए ने अमरीका के दुनिया के साथ बातचीत करने के तरीके को बदल दिया और दोस्तों और दुश्मनों दोनों के साथ भविष्य के रिश्तों के लिए माहौल बनाया। यह बड़े पैमाने पर माइग्रेशन को अमरीका के लिए सबसे बड़ा बाहरी खतरा मानता है, जो चीन, रूस और आतंकवाद से भी आगे है। यह दुनिया को अमरीका, रूस और चीन के बीच असर वाले इलाकों में बंटा हुआ देखता है। यह दक्षिणी गोलाद्र्ध में अमरीकी दबदबे को मजबूत करने के लिए मोनरो डॉक्ट्रिन को फिर से लागू करने की मांग करता है। लातिन अमरीका और कैरिबियन पर ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के फोकस में शामिल हैं :
जहां तक यूक्रेन की बात है, अमरीका ने कीव को मिलिट्री मदद दी। ट्रम्प ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत शुरू की, जिसमें अलास्का में एक मीटिंग भी शामिल है। इस झगड़े के लिए प्रैजीडैंट जेलेंस्की और प्रैजीडैंट बाइडेन को दोषी ठहराया गया। शांति बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, अमरीका और रूस फरवरी 2026 में सऊदी अरब में मिलेंगे। इसराईल और फिलिस्तीनियों के बीच बीच-बचाव करने की ट्रम्प की कोशिशें लंबे समय से चल रही हैं। अमरीका इसराईल का पूरा सपोर्ट करता है। भारत 2025 में इस उम्मीद के साथ दाखिल हुआ था कि डोनाल्ड ट्रम्प की दूसरी प्रैजीडैंसी दोनों देशों के रिश्तों में कुछ अच्छा लाएगी। भारत में ट्रम्प की व्हाइट हाऊस में वापसी को लेकर लोगों की राय कहीं ज्यादा पॉजिटिव थी। ट्रम्प ने इसे बदल दिया। पद संभालने के बाद से, ट्रम्प ने टैरिफ बढ़ाए हैं, एच1बी वीजा पर रोक लगाई है और चीन के साथ एक डील की है। सबसे नया मामला भारत में 500 प्रतिशत टैरिफ का झटका है, क्योंकि ट्रम्प ने अमरीका को एक्सपोर्ट पर 500 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव देने वाले बिल का समर्थन किया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक बार कहा था, ‘‘अमरीका धरती पर सबसे महान, सबसे ताकतवर, सबसे इज्जतदार देश के तौर पर अपनी सही जगह वापस पाएगा, जिससे पूरी दुनिया में उसकी इज्जत और तारीफ होगी। अब से कुछ ही समय में, हम गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम बदलकर गल्फ ऑफ अमेरिका करने जा रहे हैं।’’ उनका विस्तारवाद शुरू हो गया है और हमें इंतजार करना होगा कि यह कहां तक जाता है।-कल्याणी शंकर
