कार्नी ने एक बड़ा एंटी-ट्रम्प ट्रेड अलायंस बनाया

punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 05:53 AM (IST)

दुनिया के दो सबसे बड़े ट्रेडिंग ग्रुप डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ को कम करने के लिए सावधानी से करीबी रिश्ते बनाने पर नजर रख रहे हैं। यूरोपियन यूनियन और 12 देशों का इंडो-पैसिफिक ब्लॉक सबसे बड़े ग्लोबल इकोनॉमिक अलायंस में से एक बनाने के प्रस्तावों पर बातचीत शुरू कर रहे हैं।

कनाडा इस बातचीत का नेतृत्व कर रहा है, जब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले महीने मिडिल पावर्स से ट्रेड वॉर के दबाव को कम करने की अपील की थी। कुछ ही दिनों पहले ट्रम्प ने डेनमार्क के यूरोपियन सहयोगियों पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी, अगर उन्होंने ग्रीनलैंड नहीं छोड़ा। ओटावा ‘‘ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप और यूरोपियन यूनियन के बीच एक पुल बनाने की कोशिशों को सपोर्ट कर रहा है, जिससे 1.5 बिलियन लोगों का एक नया ट्रेङ्क्षडग ब्लॉक बनेगा।’’ कार्नी ने दावोस में दुनिया के नेताओं और ग्लोबल बिजनैस इलीट से कहा।

मिडिल पावर्स कार्रवाई कर रही हैं। ई.यू. और सी.पी.टी.पी.पी. इस साल कनाडा, सिंगापुर, मैक्सिको, जापान, वियतनाम, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे सदस्यों की सप्लाई चेन को यूरोप के साथ जोडऩे के लिए एक समझौता करने के लिए बातचीत शुरू कर रहे हैं। इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के करीब 40 देश एक-दूसरे के करीब आएंगे, जिसका मकसद तथाकथित रूल्स ऑफ ओरिजिन पर एक डील करना है। ये नियम किसी प्रोडक्ट की इकोनॉमिक नैशनैलिटी तय करते हैं। एक डील से दोनों ब्लॉक के मैन्युफैक्चरर कम टैरिफ प्रोसैस में सामान और उनके पार्ट्स का आसानी से ट्रेड कर पाएंगे, जिसे क्यूम्युलेशन कहते हैं।

इस महीने की शुरुआत में, कार्नी ने यूरोपियन यूनियन में अपने निजी प्रतिनिधि जॉन हैनाफोर्ड को संभावित डील पर रीजनल लीडर्स की राय जानने के लिए सिंगापुर भेजा था। कनाडा सरकार के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘काम निश्चित रूप से आगे बढ़ रहा है। हमने दुनिया भर के दूसरे पार्टनर्स के साथ इस पर बहुत फायदेमंद बातचीत की है।’’ 

ओरिजिन स्टोरी : ई.यू. और इंडो-पैसिफिक क्लब, जिसे कॉम्प्रिहैंसिव एंड प्रोग्रैसिव एग्रीमैंट फॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (सी.पी.टी.पी.पी.) के नाम से जाना जाता है, ने पिछले नवम्बर में ट्रम्प के ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ के बाद फ्री ट्रेड के बिखराव को रोकने के लिए अपनी आॢथक ताकतों को मिलाने का फैसला किया था। एक जापानी ट्रेड अधिकारी ने कहा, ‘‘हम ई.यू. और सी.पी.टी.पी.पी. पार्टियों के बीच ट्रेड बढ़ाने में बहुत वैल्यू देखते हैं, जो सप्लाई चेन की मजबूती को बढ़ाने में भी मदद करेगा।’’ एक दूसरे सी.पी.टी.पी.पी. देश के एक ट्रेड डिप्लोमैट ने कहा, ‘‘अगर ई.यू. बातचीत के लिए तैयार है, तो बेशक यह चीजों को वाकई बहुत दिलचस्प बना देगा।’’ हालांकि यह डील ‘‘वाकई ई.यू.-सी.पी.टी.पी.पी. सहयोग के बड़े दायरे का हिस्सा है।’’ 

बिजनैस बाय-इन : हालांकि, पूरे यूरोप में बिजनैस ग्रुप रूल्स-ऑफ ओरिजिन डील के सपोर्ट में जोर-शोर से आगे बढ़ रहे हैं और ब्रसल्स और लंदन को आगे बढऩे के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डी.आई.एच.के.) और ब्रिटिश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इस समझौते का पूरी तरह से सपोर्ट करते हैं। डी.आई.एच.के. में ट्रेड पॉलिसी, ई.यू. कस्टम्स और ट्रांसअटलांटिक रिलेशंस के डायरैक्टर क्लेमेंस कोबर ने कहा कि  ‘‘हमें उम्मीद है कि अगर यह सफल होता है, अगर आप अलग-अलग एरिया में ठोस फायदे देख सकते हैं, तो यह दूसरे देशों को भी इसमें शामिल होने और पॉजिटिव तरीके से टीम बनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।’’‘‘तो जितने ज्यादा होंगे, उतना अच्छा होगा।’’-ग्राहम लैंकट्री, काी-एन लुम और जॉन स्टोन 
    


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