''Digital Payment की राह में UPI चार्ज बना रोड़ा, कैश की ओर लौटेंगे छोटे कारोबारी''
punjabkesari.in Wednesday, Sep 16, 2026 - 05:20 PM (IST)
नई दिल्लीः UPI पेमेंट पर प्रस्तावित चार्ज को लेकर छोटे कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) ने बुधवार को कहा कि सरकार के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले से त्योहारों से पहले छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में हुई प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इससे वे UPI के बजाय दोबारा कैश पेमेंट की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिशों को झटका लगने की आशंका है।
सरकार ने करीब छह साल तक UPI भुगतान को पूरी तरह निःशुल्क रखने के बाद इस साल 15 अक्टूबर से इस मंच के जरिये कारोबारियों या दुकानदारों को किए जाने वाले 2,000 रुपए से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। इस शुल्क का भुगतान व्यापारी को करना होगा और ग्राहकों पर इसका बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि, रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन और छोटे भुगतान को किसी भी शुल्क से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।
RAI ने गिनाए नुकसान
आरएआई ने कहा कि 75,000 रुपए और उससे अधिक के लेनदेन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपए रखी गई है। इससे उपभोक्ता इसके दायरे से बाहर रहेंगे लेकिन इसका खर्च कारोबारियों को उठाना होगा, जिनमें से कई कम मार्जिन पर कारोबार करते हैं। आरएआई ने अपने बयान में आगाह किया कि यह शुल्क भारत के सबसे छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में वर्षों में हुई प्रगति को पीछे धकेल सकता है, वह भी ठीक ऐसे समय जब त्योहार आने वाले हैं।
नकदी की ओर लौट सकते हैं छोटे व्यापारी
आरएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कुमार राजगोपालन ने कहा, ''छोटे व्यापारी अब यह सोचेंगे कि नकदी स्वीकार करें या यूपीआई।'' आरएआई ने कहा कि नकदी की ओर वापसी से सरकार के औपचारिकरण के प्रयासों को भी नुकसान होगा, क्योंकि यूपीआई नेटवर्क से बाहर होने वाले लेनदेन अब माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में दर्ज नहीं होंगे। यह उस दिशा के विपरीत है जिसे एक दशक की डिजिटलीकरण नीति के जरिये बनाने की कोशिश की गई है।
उद्योग के लिए मुश्किल समय
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के अध्यक्ष संतोष कटारिया ने कहा, ''त्योहारों की शुरुआत में यूपीआई पर एमडीआर लागू करना उद्योग के लिए इससे मुश्किल समय नहीं हो सकता था। यह अवधि कारोबारियों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं से सीधे जुड़े कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है। इनमें से कई मांग में सुधार लाने और मार्जिन बढ़ाने के लिए पहले से ही कड़ी मेहनत कर रहे हैं।''
कटारिया ने कहा, ''यूपीआई खपत को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम रहा है और भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ाने वाले किसी भी कदम को सावधानी से तय करने की जरूरत है, खासकर साल के सबसे महत्वपूर्ण बिक्री सत्र के दौरान।'' आरएआई ने कहा कि वह इस मुद्दे को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाएगा। वह ऐसी क्रमिक एमडीआर संरचना की मांग करेगा, जिसमें 'डेबिट' से जुड़े यूपीआई लेनदेन और 'क्रेडिट' से जुड़े लेनदेन के बीच अंतर किया जाए। साथ ही छोटे खुदरा कारोबारियों को औपचारिक भुगतान प्रणाली में बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन देने की भी मांग की जाएगी।
