‘दुनिया बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही, बजट को दीर्घकालिक सोच से जोड़ना जरूरी’ : रघुराम राजन

punjabkesari.in Wednesday, Jan 28, 2026 - 11:48 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि आने वाले केंद्रीय बजट को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को ज्यादा मजबूत, आत्मनिर्भर और तेजी से बढ़ने वाली बनाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक हालात बेहद चुनौतीपूर्ण और खतरनाक हैं। राजन ने कहा कि पहले भारत में पंचवर्षीय योजनाएं हुआ करती थीं लेकिन तब भी बजट को सही मायनों में दीर्घकालिक सोच से नहीं जोड़ा गया। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि 2026-27 का केंद्रीय बजट दीर्घकालिक सोच के साथ आना चाहिए। हमें यह तय करना होगा कि भारत को एक ऐसी अर्थव्यवस्था कैसे बनाना है जो ज्यादा जुझारू हो, ज्यादा स्वतंत्र हो और इतनी तेजी से आगे बढ़े कि दुनिया के बाकी देश भारत से दोस्ती करना चाहें।”

1 फरवरी को पेश होगा बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि अस्थिर भू-राजनीतिक हालात और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सरकार आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठा सकती है। राजन ने कहा कि यह समय वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद जोखिम भरा है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बड़े निवेश से कई सकारात्मक अवसर भी सामने आ रहे हैं।

अत्यधिक निर्भरता खतरनाक

राजन ने आगाह किया कि कुछ चुनिंदा वैश्विक संस्थाओं पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता भारत को कमजोर बना सकती है। उन्होंने कहा कि भारत के पास फिलहाल ऐसा कोई स्वाभाविक और समृद्ध पड़ोसी बाजार नहीं है, जहां वह बड़े पैमाने पर अपनी आपूर्ति कर सके। उन्होंने संकेत दिए कि आगामी बजट में कुछ ऐसे टैरिफ में कटौती की जा सकती है, जो भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर तरीके से जुड़ने से रोकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें निवेश अनुकूल नीतियां बना रही हैं लेकिन और ज्यादा प्रयासों की जरूरत है।

अब फिर से सुधारों का समय

अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव पर सवाल के जवाब में राजन ने कहा कि भारत को कुछ समय के लिए आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि तेज आर्थिक वृद्धि के लिए क्या जरूरी है। उन्होंने कहा, “1990 के दशक से लेकर 2000 के शुरुआती वर्षों तक बड़े सुधार हुए लेकिन उसके बाद सुधारों की रफ्तार धीमी पड़ गई। अब वक्त आ गया है कि उस प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाए।”

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मौका

राजन ने कहा कि मौजूदा वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के चलते भारत के पास वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में खुद को दोबारा स्थापित करने का सुनहरा अवसर है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी भी वैश्विक सप्लाई चेन का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है, क्योंकि वह चीन को छोड़कर किसी बड़ी अर्थव्यवस्था के पास नहीं है और चीन के साथ सीमा विवाद भी है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को भविष्य में चीन के साथ-साथ यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, पश्चिम एशिया और पूर्वी एशियाई देशों के साथ अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लानी होगी।

चीन जैसी ग्रोथ जरूरी नहीं

भारत की लगातार 8–9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि पर सवाल के जवाब में राजन ने कहा कि भारत को चीन जैसी तेज लेकिन अस्थिर वृद्धि की नकल करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन की तेज वृद्धि का एक हिस्सा टिकाऊ नहीं था, जिसका नतीजा आज उसके प्रॉपर्टी सेक्टर की गंभीर समस्याओं के रूप में सामने आ रहा है।


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Content Writer

jyoti choudhary

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