लोन लेना हो सकता है मंहगा, अक्टूबर में RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें

punjabkesari.in Sunday, Oct 04, 2026 - 12:14 PM (IST)

नई दिल्ली : यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार यह उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करेगा। महंगाई का रिस्क बना हुआ है इसलिए FY27 में और बढ़ोतरी की संभावना है जिससे बेंचमार्क रेट 5.75–6 प्रतिशत तक जा सकता है और G-sec यील्ड पर दबाव पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो लोन लेना महंगा हो सकता है और साथ ही साथ अगर आपका मौजूदा लोन चल रहा है तो उसकी किश्त बढ़ सकती है।

बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सितंबर में भारतीय सरकारी बॉन्ड दबाव में रहे क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल यील्ड में बढ़ोतरी ने RBI द्वारा रेट बढ़ाने की उम्मीदों को मजबूत किया। साथ ही, घरेलू बॉन्ड की ज्यादा सप्लाई (जिसमें RBI का ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) सेल और दूसरी छमाही के बॉरोइंग कैलेंडर में लंबी अवधि के बॉन्ड जारी करना शामिल है) ने दबाव बढ़ाया और कुल सरकारी बॉरोइंग कम होने के बावजूद यील्ड को ऊंचा बनाए रखा। 

रिपोर्ट में कहा गया, 'यह दबाव खासकर 5-साल वाले सेगमेंट में दिखा। सितंबर के दौरान 5-साल के G-Sec की यील्ड 45bps बढ़ी, जबकि 10-साल वाले की यील्ड 24bps बढ़ी, जिससे 10-साल और 5-साल के बीच का अंतर (स्प्रेड) 36bps से घटकर 16bps रह गया।' इसमें यह भी बताया गया कि सरकार की योजना H2FY27 में 7.86 लाख करोड़ रुपए की ग्रॉस डेटेड G-Sec बॉरोइंग की है, जिसमें बजट में तय और अनुमानित ग्रॉस बॉरोइंग के बीच का अंतर लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपए है। 

नेट बॉरोइंग में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है क्योंकि एग्रेसिव स्विच ऑक्शन के जरिए रिडेम्पशन (बॉन्ड की मैच्योरिटी पर भुगतान) को कम किया गया है; बॉन्ड स्विच ने पेमेंट को आगे बढ़ा दिया है, जिससे FY27 में रिडेम्पशन और रीफाइनेंसिंग की जरूरतें कम हो गई हैं।' T-बिल की ज्यादा बिक्री और राज्यों की थोड़ी ज्यादा बॉरोइंग से भी मार्केट में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है। 

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सेंट्रल बैंक वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन, ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) सेल और फॉरेन एक्सचेंज स्वैप के जरिए FCNR(B) से सरप्लस को सोखना जारी रखे हुए है। सितंबर में तीन ऑक्शन में कुल 1 लाख करोड़ रुपए के OMO सेल हुए, जिससे बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस घटकर 4.85 लाख करोड़ रुपए रह गई जो 6 सितंबर को ₹11.16 लाख करोड़ थी। 

लेंडर के अनुसार, 'CRR में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम लगती है, क्योंकि RBI ने पहले ही योग्य FCNR(B) डिपॉजिट को रिजर्व की जरूरतों से छूट दे दी है।' रिपोर्ट के मुताबिक कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में व्यापक बढ़ोतरी की संभावना कम है, क्योंकि RBI ने पहले ही योग्य FCNR(B) डिपॉजिट को रिजर्व की जरूरतों से छूट देने का फैसला किया था। इसमें कहा गया, 'हमें उम्मीद है कि 25 बेसिस पॉइंट (bps) की बढ़ोतरी होगी और इसके बाद FY27 के बाकी समय में एक या दो और बढ़ोतरी हो सकती हैं, जिससे रेपो रेट 5.75–6.00% तक पहुंच जाएगा। साथ ही महंगाई पर लगातार नजर रखने का संकेत देने वाला सख्त रुख (hawkish guidance) भी देखने को मिल सकता है।' 

इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि "अगर पॉलिसी को सख्त करने के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, ग्लोबल यील्ड बढ़ती है और नीलामी में मांग कम रहती है, तो 10-साल के G-Sec यील्ड पर और ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है।' 


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Content Writer

Sanjeev

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