SBI Loan Rate Hike: SBI ने ग्राहकों को दिया झटका, कर्ज हुआ महंगा, बढ़ सकता है EMI का बोझ
punjabkesari.in Thursday, Oct 15, 2026 - 04:20 PM (IST)
नई दिल्लीः देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। बैंक ने 15 अक्टूबर से कई अवधि के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.15 फीसदी यानी 15 बेसिस पॉइंट का इजाफा किया है। इस बदलाव का असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके लोन की ब्याज दर MCLR से जुड़ी है। ऐसे ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है, हालांकि वास्तविक असर लोन की शर्तों और ब्याज दर रीसेट होने की तारीख पर निर्भर करेगा।
SBI की नई MCLR दरें लागू
SBI की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बैंक ने तीन महीने की अवधि के लिए MCLR को 8.25 फीसदी से बढ़ाकर 8.40 फीसदी कर दिया है। छह महीने की अवधि के लिए यह दर 8.60 फीसदी से बढ़कर 8.75 फीसदी हो गई है।
वहीं, एक साल की अवधि के लिए MCLR 8.70 फीसदी से बढ़कर 8.85 फीसदी हो गया है। दो साल की अवधि के लिए दर 8.75 फीसदी से बढ़ाकर 8.90 फीसदी और तीन साल की अवधि के लिए 8.80 फीसदी से बढ़ाकर 8.95 फीसदी कर दी गई है।
हालांकि, ओवरनाइट और एक महीने की अवधि के लिए MCLR में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन दोनों अवधि की दरें 7.85 फीसदी पर स्थिर हैं।
लोन लेने वालों की EMI पर क्या होगा असर?
MCLR वह बेंचमार्क दर है, जिसका इस्तेमाल बैंक कुछ लोन की ब्याज दर तय करने के लिए करते हैं। इसमें बढ़ोतरी होने पर इससे जुड़े लोन महंगे हो सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों को पहले की तुलना में ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है और उनकी EMI भी बढ़ सकती है।
हालांकि, ब्याज दर बढ़ने का असर सभी ग्राहकों पर तुरंत नहीं पड़ेगा। यह लोन की शर्तों, मौजूदा ब्याज दर और अगली रीसेट तारीख पर निर्भर करेगा। जिन ग्राहकों के लोन किसी दूसरे बेंचमार्क से जुड़े हैं, उन पर SBI के MCLR में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
30 लाख रुपए के लोन पर कितना बढ़ सकता है बोझ?
अगर 30 लाख रुपए का लोन 30 साल के लिए लिया गया है, तो ब्याज दर में बदलाव के बाद EMI में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्राहक की मौजूदा ब्याज दर कितनी है और नई दर उसके लोन पर कब से लागू होगी।
इसलिए ग्राहकों को अपनी लोन एग्रीमेंट की शर्तें, ब्याज दर का प्रकार और अगली रीसेट तारीख जरूर जांचनी चाहिए, ताकि वे अपने मासिक बजट पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन कर सकें।
