RBI को भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा, बढ़ाया GDP ग्रोथ अनुमान, 6.7% से 7.1% किया
punjabkesari.in Wednesday, Oct 07, 2026 - 11:27 AM (IST)
नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, दूसरी और तीसरी तिमाही के ग्रोथ अनुमान भी बढ़ाए गए हैं।
RBI ने Q2FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7.2% और Q3FY27 के लिए 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। वहीं, Q4FY27 के लिए विकास दर का अनुमान 6.8% पर बरकरार रखा गया है। हालांकि, Q1FY28 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया गया है।
मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए नया GDP ग्रोथ अनुमान पिछले अनुमान से 0.4 प्रतिशत अधिक है।
घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती
RBI गवर्नर ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और MPC को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार आगे भी कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि को मुख्य रूप से निजी खपत से समर्थन मिला। लोगों की डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग यानी गैर-जरूरी खर्च करने की इच्छा ने खपत को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
मल्होत्रा ने कहा कि हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से संकेत मिलता है कि दूसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में रफ्तार में कुछ कमी आई। लागत संबंधी दबाव के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में मजबूती बनी रही।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता
भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान में ऐसे समय में बढ़ोतरी की गई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। RBI गवर्नर ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी रहने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक आर्थिक सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में अस्थिरता बढ़ाई है। वहीं, व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण भी बाजार में चिंता बनी हुई है। युद्ध और सख्त मौद्रिक नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं।
महंगाई पर RBI की नजर
महंगाई को लेकर RBI गवर्नर ने कहा कि खाद्य कीमतों का दबाव अब व्यापक होता जा रहा है। चीनी और प्याज जैसी वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। अगस्त में खाद्य और ईंधन महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई, जिसका प्रमुख कारण प्रतिकूल बेस इफेक्ट रहा।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक महंगाई के दबाव का आकलन करने के लिए महंगाई की उम्मीदों, कंपनियों के मूल्य निर्धारण व्यवहार, कोर महंगाई के रुझान और डिफ्यूजन इंडेक्स समेत कई संकेतकों पर नजर रखता है।
