Petrol-Diesel News: और महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल, कच्चे तेल पर ब्रोकरेज का बड़ा अलर्ट
punjabkesari.in Friday, Jun 05, 2026 - 12:35 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आने की आशंका जताई जा रही है। इसका असर केवल पेट्रोल और डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर पर भी दबाव पड़ सकता है।
ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान 80 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। हालांकि, कंपनी का मानना है कि वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही तक कीमतें घटकर लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं।
कीमतें गिरीं, लेकिन खतरा टला नहीं
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। बाद में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद से इसमें करीब 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तेल बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन अभी भी दबाव में है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं। कई देशों ने अपने आपातकालीन भंडार का उपयोग किया है, जबकि कुछ देशों ने पुराने स्टॉक को बाजार में उतारा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक वैश्विक भंडार ऐसे स्तर पर पहुंच सकते हैं, जहां किसी भी नई आपूर्ति बाधा का बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है तेल
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यदि इस मार्ग से तेल आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं होती, तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल आ सकता है।
एमके ग्लोबल का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौते की संभावना फिलहाल कम है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड का भाव 150 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी जा सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी तक कुछ कारणों से तेल कीमतों में और बड़ी तेजी नहीं आई है। इनमें आपातकालीन तेल भंडार का उपयोग, ओईसीडी देशों और चीन द्वारा स्टॉक जारी करना, रिफाइनरियों का कम उत्पादन, खाड़ी देशों के बाहर के उत्पादकों द्वारा बढ़ा हुआ निर्यात तथा कई देशों में कमजोर मांग शामिल हैं। हालांकि, ये सहायक कारक धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं।
GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाया
महंगे तेल का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इसी कारण एमके ग्लोबल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से घटाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
