UBS downgrades OMC Stocks: तेल की कीमतों में उछाल से OMC शेयर दबाव में, UBS ने घटाया टारगेट प्राइस
punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 12:24 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्म UBS ने भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर अपनी रेटिंग में बदलाव किया है। ब्रोकरेज ने Indian Oil Corporation (IOC) और Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ कर दी है, जबकि Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) को ‘सेल’ की रेटिंग दी है।
ब्रोकरेज का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में हालिया तेजी 2022 के तेल संकट जैसी स्थिति की याद दिलाती है। ऐसे माहौल में भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव करना आसान नहीं होता। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी भी कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ा रही है। फिलहाल रुपया करीब 92 प्रति डॉलर के पार है, जबकि 2022 में यह लगभग 79 के स्तर पर था।
मुनाफे के अनुमान में कटौती
ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए भारतीय तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन के अनुमान में 43–45% और 22–26% तक की कटौती की है। हालांकि इसी अवधि में ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) का अनुमान 30–48% और 21–39% तक बढ़ाया गया है।
यूबीएस के अनुसार यदि कंपनियों की कमाई मार्केटिंग से घटकर रिफाइनिंग की ओर शिफ्ट होती है तो इसका फायदा सीमित रहेगा, क्योंकि इन कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा ईंधन की मार्केटिंग से आता है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अनुमानित शुद्ध लाभ (PAT) में IOC के लिए 19%, BPCL के लिए 15% और HPCL के लिए 46% तक की कटौती की है।
शेयर बाजार में गिरावट
ब्रोकरेज की इस रिपोर्ट के बाद सोमवार को शेयर बाजार में तेल कंपनियों के शेयरों में दबाव देखा गया। BSE Oil & Gas Index इंट्राडे कारोबार में करीब 3% तक गिर गया। वहीं IOC, BPCL और HPCL के शेयरों में लगभग 8% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसी दौरान BSE Sensex भी करीब 2.8% नीचे कारोबार करता दिखा।
तेल की कीमतों में बड़ी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 40 महीने बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अप्रैल 2026 के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में इसकी कीमत करीब 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो एक ही सत्र में 25% से ज्यादा की तेजी दर्शाती है।
पिछले एक महीने में ही ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 68 डॉलर से बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, यानी करीब 71% की उछाल।
आगे क्या है अनुमान
यूबीएस की ग्लोबल ऑयल टीम ने निकट अवधि के लिए तेल कीमत के अनुमान भी बढ़ाए हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक अगर सप्लाई में बाधा कुछ हफ्तों तक बनी रहती है तो बाजार में जोखिम प्रीमियम बना रह सकता है। वहीं यदि संघर्ष लंबा चलता है या ऊर्जा ढांचे पर हमले बढ़ते हैं तो ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर से ऊपर और संभवतः 100 डॉलर से भी ऊपर बना रह सकता है।
पेट्रोल-डीजल कीमतों पर असर
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें मई 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं, जबकि वैश्विक तेल कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। ब्रोकरेज का मानना है कि यदि कीमतें बढ़ाई जाती हैं या उत्पाद शुल्क में कटौती की जाती है तो उसका असर सीमित समय तक ही रहेगा।
हालांकि हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है। ब्रोकरेज के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल और डॉलर-रुपया दर 92 के आसपास रहती है तो तेल कंपनियों का संयुक्त मार्जिन करीब 4–5 रुपए प्रति लीटर रह सकता है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 13–14 रुपए प्रति लीटर था।
टारगेट प्राइस में कटौती
कमाई को लेकर अनिश्चितता देखते हुए यूबीएस ने इन कंपनियों के टारगेट प्राइस भी घटा दिए हैं।
- IOC का टारगेट प्राइस 190 रुपए से घटाकर 175 रुपए कर दिया गया।
- BPCL का टारगेट प्राइस 425 रुपए से घटाकर 365 रुपए कर दिया गया।
- HPCL का टारगेट प्राइस 540 रुपए से घटाकर 340 रुपए कर दिया गया।
ब्रोकरेज का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी और मार्जिन पर बढ़ते दबाव के कारण आने वाले समय में इन कंपनियों की कमाई पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।
