तेल संकट गहराया: घाटे में कंपनियां, बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

punjabkesari.in Friday, Mar 20, 2026 - 04:09 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने सबसे पहले तेल बाजार को झटका दिया है। सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे बड़े सप्लायरों की सप्लाई घटने से वैश्विक बाजार में कमी आ गई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है और फिलहाल इसमें नरमी के संकेत नहीं दिख रहे।

भारत को झटका

इसका असर भारत पर भी तेजी से पड़ा है। मार्च की शुरुआत में देश का तेल आयात घटकर करीब 1.9 मिलियन बैरल रह गया, जबकि कुछ समय पहले यह करीब 25 मिलियन बैरल के आसपास था यानी सप्लाई चेन में आई रुकावट ने भारत जैसे बड़े आयातक को भी झटका दिया है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाले समय की चेतावनी है।

अरबों डॉलर का पड़ सकता अतिरिक्त बोझ 

तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत के आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी में जहां कच्चा तेल औसतन 69 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं मार्च में यह 110 डॉलर के पार पहुंच गया। इससे देश का ट्रेड डेफिसिट बढ़ने का खतरा है और एक महीने में ही अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से आयात बिल में हर महीने करीब 166 मिलियन डॉलर का इजाफा होता है यानी तेल सिर्फ महंगा नहीं हुआ, बल्कि अर्थव्यवस्था को खींच रहा है।

तेल कंपनियां रोज घाटे में, कीमत बढ़ना तय

इस बीच, तेल कंपनियों पर भी दबाव बढ़ गया है। पेट्रोल और डीजल बेचने वाली कंपनियां भारी घाटे में चल रही हैं और मार्च में अब तक करीब 8,800 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। हर दिन 2,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा बढ़ रहा है। मौजूदा हालात में यह घाटा और बढ़ सकता है, जिससे आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।

पिछले 15 दिनों के औसत के हिसाब से डीजल पर 36 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 17.5 रुपए प्रति लीटर का नुकसान चल रहा है, जो मौजूदा हालात में यह घाटा और बढ़कर डीजल पर 55 रुपए और पेट्रोल पर 25 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। सीधी बात, यह स्थिति ज्यादा दिन नहीं चल सकती। कीमतें बढ़ना अब लगभग तय माना जा रहा है।

LNG दोगुना महंगा

संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, गैस बाजार भी इसकी चपेट में आ गया है। कतर से सप्लाई प्रभावित होने के चलते LNG की कीमतें दोगुनी होकर 10 डॉलर से 20 डॉलर प्रति mmbtu तक पहुंच गई हैं। इससे भारत की करीब 25% गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर उर्वरक, बिजली और उद्योगों पर पड़ेगा।

हालांकि इस स्थिति में कुछ कंपनियों को फायदा हो सकता है, खासकर तेल और गैस उत्पादन से जुड़ी कंपनियां। वहीं गैस आधारित और ईंधन पर निर्भर सेक्टरों के लिए यह बड़ा झटका है। कुल मिलाकर, अगर पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। इसका असर महंगाई, औद्योगिक लागत और आम लोगों के खर्च पर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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