मिडिल ईस्ट तनाव से भारतीय उद्योग पर गहराया संकट, खतरे में 800 छोटी कंपनियां, UAE में फंसे ₹12,000 करोड़

punjabkesari.in Thursday, Mar 19, 2026 - 12:32 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब भारतीय कारोबार और उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते देश की करीब 800 छोटी और मझोली कंपनियों (SMEs) के निवेश पर खतरा मंडरा रहा है।

पिछले छह महीनों में इन कंपनियों ने United Arab Emirates (UAE) में लगभग 12,000 करोड़ रुपए (करीब 1.3 अरब डॉलर) का निवेश किया है लेकिन United States-Iran तनाव का सबसे ज्यादा असर रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर पड़ रहा है, जहां 280 भारतीय कंपनियों ने हाल के महीनों में करीब 40 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के कारण भारतीय MSME कंपनियां अधिक जोखिम में हैं। आपूर्ति में कमी, माल ढुलाई की बढ़ती लागत, लॉजिस्टिक बाधाएं और भुगतान में देरी से नकदी प्रवाह प्रभावित हो रहा है, जिससे कंपनियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

उत्पादन पर गहरा असर

संघर्ष का असर अब भारत की पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन पर भी गंभीर रूप से दिखने लगा है। पॉलिमर (प्लास्टिक कच्चा माल) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे प्लास्टिक प्रोसेसिंग उद्योग पर दबाव बढ़ गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में करीब 50% इकाइयों ने उत्पादन बंद कर दिया है। पीपी (Polypropylene), एचडीपीई (HDPE), एलएलडीपीई (LLDPE), पीवीसी और पीईटी रेजिन जैसे प्रमुख पॉलिमर की कीमतों में 78% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कच्चे माल की कमी के चलते उत्पादन क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है—जो इकाइयां पहले 100 टन प्रति माह उत्पादन करती थीं, वे अब घटकर 20 टन तक सिमट गई हैं।

ड्राई फ्रूट बाजार में उछाल

तनाव का असर ड्राई फ्रूट बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। आपूर्ति बाधित होने के कारण कई मेवों की कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी हुई है।

Khari Baoli जैसे बड़े थोक बाजारों में व्यापारी फिलहाल पुराने स्टॉक के सहारे काम चला रहे हैं। बादाम, अंजीर, पाइन नट्स, खजूर और कई औषधीय जड़ी-बूटियों की सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।

दवा उद्योग भी प्रभावित

पेट्रोकेमिकल्स से जुड़े कच्चे माल—जैसे नैफ्था, स्टाइरीन और पॉलीइथिलीन—की आपूर्ति प्रभावित होने से फार्मा सेक्टर पर भी दबाव बढ़ गया है। दवाओं के कई एक्टिव कंपोनेंट इन्हीं कच्चे माल से बनते हैं, जिस कारण भारत और China जैसे बड़े फार्मा हब भी प्रभावित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर भारतीय उद्योग, महंगाई और सप्लाई चेन पर और गहरा हो सकता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

jyoti choudhary

Related News