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NBFC संकट के कारण बैंकों के समक्ष एनपीए का जोखिम बढ़ाः मूडीज

2019-12-13T14:21:36.693

मुंबईः गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में तरलता के कायम संकट के कारण बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का जोखिम बढ़ सकता है। मूडीज ने एक रिपोर्ट में यह आशंका व्यक्त की है। मूडीज इंवेस्टर्स सर्विसेज ने शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि बैंकिग क्षेत्र के एनपीए का जोखिम इन एनबीएफसी के साथ ही इनके ऊपर वित्तपोषण के लिये निर्भर कंपनियों के कारण भी बढ़ सकता है।

उसने कहा कि एनपीए का प्रसार एनबीएफसी से कर्जदारों और अंतत: बैकों तक होगा। इससे बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार, उनके मुनाफे और पूंजी पर असर पड़ेगा। आईएलएंडएफएस के सितंबर 2018 में दिवालिया होने के बाद से एनबीएफसी क्षेत्र तरलता संकट से जूझ रहा है। मूडीज ने कहा, ‘‘सितंबर 2018 में आईएलएंडएफएस के द्वारा कर्ज की किस्तों का भुगतान करने में चूक करने के कारण एनबीएफसी के समक्ष वित्तपोषण का संकट आ गया। इस कारण कर्ज की उपलब्धता के लिये गैर-बैंकिंग कर्जदाताओं पर निर्भर अर्थव्यवस्था में बैंकों के समक्ष संपत्ति की गुणवत्ता का जोखिम बढ़ गया है।''

उसने कहा कि तरलता संकट के कारण एनबीएफसी ऋण वितरण में कमी ला रहे हैं जिसका परिणाम गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र पर निर्भर कर्जदारों के समक्ष वित्तपोषण की समस्या के रूप में सामने आया है। रिपोर्ट में कहा गया कि इससे एनबीएफसी के समक्ष ऋण के एनपीए होने का जोखिम बढ़ा है और इसके कारण उन्हें वित्तपोषण पाने में दिक्कतों का सामना करते रहना पड़ेगा। मूडीज ने कहा कि एनबीएफसी के उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति कमजोर होने से उन्हें बैंक भी ऋण देने में आना-कानी करेंगे। इससे उनका वित्तीय संकट और गंभीर होगा तथा इसके कारण ये कंपनियां बैंकों का एनपीए बढ़ा सकती हैं।


Supreet Kaur

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