खदानें बंद, संकट में सप्लाई....क्या अब कॉपर तोड़ेगा रिकॉर्ड? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 05:36 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः वैश्विक बाजारों में चांदी भले ही रिकॉर्ड स्तरों के आसपास टिकी हो लेकिन इस समय सबसे दमदार चाल कॉपर दिखा रहा है। जहां चांदी को सुरक्षित निवेश की मांग से सहारा मिला है, वहीं कॉपर की तेजी की असली वजह गहराता सप्लाई संकट और लगातार बढ़ती औद्योगिक जरूरतें हैं।
खनन पर ब्रेक, कॉपर सप्लाई संकट में
टाटा म्यूचुअल फंड की ताजा कमोडिटी रिपोर्ट के मुताबिक कॉपर की सप्लाई गंभीर दबाव में है। चिली और पेरू में बार-बार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से खनन गतिविधियां बाधित हुई हैं। वहीं इंडोनेशिया की ग्रासबर्ग खदान, जो दुनिया की सबसे बड़ी कॉपर खदानों में शामिल है, वहां उत्पादन रुकने से कंपनी को फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ा है।
इसके अलावा कांगो में आई बाढ़ और चिली में हुए खदान हादसों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। 2025 में शुरू हुआ यह संकट अब 2026 तक खिंचता नजर आ रहा है।
2026 में भी नहीं दिखती राहत
रिपोर्ट बताती है कि 2026 में रिफाइंड कॉपर बाजार में करीब 1.5 लाख टन की कमी रह सकती है। पुरानी खदानों से उत्पादन घट रहा है, जबकि नई खदानें शुरू करना महंगा और समय लेने वाला है। ऐसे में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद फिलहाल कमजोर बनी हुई है।
मांग बनी हुई है मजबूत
दूसरी ओर कॉपर की मांग लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ग्रिड विस्तार जैसे सेक्टरों में कॉपर की खपत तेजी से बढ़ी है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की सुस्ती भी इस मांग को कमजोर नहीं कर पाई है।
अमेरिका-चीन फैक्टर ने बढ़ाया दबाव
अमेरिका ने कॉपर को क्रिटिकल मिनरल की सूची में शामिल कर लिया है, जिससे इस पर टैरिफ बढ़ने की आशंका बन गई है। डॉलर की कमजोरी, अमेरिका में मौद्रिक नरमी और चीन से संभावित प्रोत्साहन पैकेज ने कीमतों को और मजबूती दी है। इस बीच कॉपर के भंडार भी तेजी से घटे हैं।
एक्सपर्ट की साफ राय
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक EV और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ती खपत के कारण कॉपर की मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि सप्लाई सीमित है। यही असंतुलन आने वाले समय में कॉपर की कीमतों को और ऊपर धकेल सकता है।
