Petrol Rate Hike: दुनियाभर में Petrol-Diesel की कीमतों में भारी उछाल, भारत में क्यों हैं कीमतें स्थिर?
punjabkesari.in Wednesday, May 06, 2026 - 04:54 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः ईरान युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 107 डॉलर तक पहुंच गई है, जिसका असर दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर साफ दिख रहा है। लेकिन भारत में अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
कई देशों में ईंधन के दाम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
ताजा ग्लोबल आंकड़ों के अनुसार कई देशों में फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। लाओस में डीजल की कीमत 149.7% और पेट्रोल 35.8% तक बढ़ गया है। म्यांमार में पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% महंगा हुआ है। न्यूजीलैंड में भी डीजल 88.6% और पेट्रोल 30.7% तक बढ़ा है।
यूएई में पेट्रोल 52.4% और डीजल 86% तक महंगा हुआ है। वहीं, अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में 44.5% की वृद्धि दर्ज की गई है, जहां एक लीटर पेट्रोल लगभग 119.55 रुपए तक पहुंच गया है।
यूरोप और एशिया में भी महंगाई का असर
यूरोपीय देशों में भी ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। यूके में पेट्रोल 202.15 रुपए प्रति लीटर, फ्रांस में 223.36 रुपए, जर्मनी में 223.67 रुपए और इटली में 213.49 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। आयरलैंड में भी पेट्रोल 202.35 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
हांगकांग दुनिया में सबसे महंगे पेट्रोल बाजारों में शामिल है, जहां कीमत लगभग 394.95 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इजरायल में यह 269.19 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर है।
भारत में कीमतें स्थिर क्यों हैं?
भारत में इसके विपरीत स्थिति देखने को मिल रही है, जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी तक कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसका मुख्य कारण सरकार का हस्तक्षेप और नीतिगत नियंत्रण बताया जा रहा है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि फिलहाल ईंधन और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कीमतें तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार नहीं बढ़ाई जाती। सरकार और तेल कंपनियां कुछ समय तक बाजार की स्थिति पर नजर रखती हैं। जरूरत पड़ने पर टैक्स और ड्यूटी में बदलाव कर कीमतों को नियंत्रित किया जाता है।
