Petrol-Diesel पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल निर्यात पर टैक्स जीरो, डीजल पर बढ़ाया शुल्क
punjabkesari.in Saturday, Oct 31, 2026 - 04:15 PM (IST)
नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को शून्य कर दिया है, जबकि डीजल पर इसे बढ़ाकर 11.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में भी बढ़ोतरी की गई है। नई दरें अगले 15 दिनों तक लागू रहेंगी।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, घरेलू खपत के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए फैसले का असर मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर पड़ेगा।
पेट्रोल पर टैक्स शून्य, डीजल पर बढ़ोतरी
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को 2.5 रुपए प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर टैक्स 8.5 रुपए से बढ़ाकर 11.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसके अलावा ATF के निर्यात पर लगने वाला शुल्क भी 10.5 रुपए से बढ़ाकर 11 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा के आधार पर इन दरों में बदलाव करती है।
अक्टूबर में कच्चे तेल की कीमतों में 14 फीसदी उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अक्टूबर में कच्चे तेल के दाम करीब 14 फीसदी बढ़ चुके हैं। ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 113.4 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। वहीं, दो दिन पहले भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 114.6 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई थी।
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित टकराव को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
भारत किन पेट्रोलियम उत्पादों का करता है निर्यात?
भारत बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। इनमें डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल, नेफ्था और फ्यूल ऑयल प्रमुख हैं। कुल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में डीजल की हिस्सेदारी करीब 42 फीसदी, जबकि पेट्रोल की हिस्सेदारी लगभग 23 फीसदी है।
निर्यात के इस कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज की बड़ी भूमिका है। भारत से होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में रिलायंस की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी बताई जाती है। इसके अलावा रूसी निवेश वाली नायरा एनर्जी, सरकारी कंपनी मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) और अन्य रिफाइनरियां भी पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं।
