Stocks Crash: IT शेयरों में हाहाकार, 2008 के बाद सबसे बड़ा क्रैश!
punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 03:22 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः फरवरी का महीना आईटी सेक्टर के लिए भारी दबाव लेकर आया है। NIFTY IT इस महीने अब तक 20% से ज्यादा टूट चुका है और महीने में अभी कुछ दिन बाकी हैं। अगर यह गिरावट बरकरार रहती है, तो सितंबर 2008 के बाद यह इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट होगी, वही दौर जब वैश्विक वित्तीय संकट की शुरुआत हुई थी।
साल 2026 की शुरुआत से अब तक इंडेक्स के सभी 10 शेयर 10% से ज्यादा फिसल चुके हैं, जबकि इनमें से 6 कंपनियों के शेयर सिर्फ दो महीनों में 20% से ज्यादा टूट गए हैं।
कोफोर्ज सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर
इस साल इंडेक्स में सबसे कमजोर प्रदर्शन Coforge का रहा है। जनवरी-फरवरी में ही शेयर करीब 25% गिर चुका है। 2022 के बाद यह इसका सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। हालांकि, इसे कवर करने वाले 38 में से 29 एनालिस्ट अब भी ‘खरीद’ की सलाह दे रहे हैं और औसत टारगेट के आधार पर करीब 51% संभावित तेजी का अनुमान जता रहे हैं।
विप्रो पर भी दबाव
Wipro के शेयर में इस साल अब तक लगभग 23.5% की गिरावट आई है। 2022 के बाद यह इसका सबसे कमजोर साल बनता दिख रहा है। 47 में से केवल 10 एनालिस्ट ही फिलहाल इसे ‘खरीद’ की सलाह दे रहे हैं। औसत अनुमान के मुताबिक, मौजूदा स्तर से 29% तक की रिकवरी संभव है।
मिडकैप आईटी भी अछूता नहीं
मिडकैप आईटी कंपनियों में गिने जाने वाले Persistent Systems के शेयर में भी करीब 23.5% की गिरावट आई है। इसके बावजूद 43 में से 25 एनालिस्ट इसे ‘खरीद’ रेटिंग दे रहे हैं और करीब 39% अपसाइड की संभावना जता रहे हैं।
LTIMindtree भी 22% से ज्यादा फिसल चुका है। 44 में से 22 एनालिस्ट अब भी इसमें 36% तक की संभावित तेजी देख रहे हैं।
बड़ी कंपनियां भी दबाव में
देश की दिग्गज आईटी कंपनी Infosys करीब 20% टूट चुकी है, जो 2008 के बाद सबसे खराब शुरुआत मानी जा रही है। 52 में से 37 एनालिस्ट अब भी इसे ‘खरीद’ की सलाह दे रहे हैं और औसतन 37% अपसाइड का अनुमान है।
इसके अलावा:
- Mphasis लगभग 20% नीचे
- Tata Consultancy Services करीब 19% कमजोर
- HCL Technologies लगभग 16% गिरा
- Oracle Financial Services Software करीब 15% नीचे
- Tech Mahindra लगभग 12% टूटा
गिरावट की वजह क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, क्लाइंट्स के आईटी खर्च में सुस्ती और वैल्यूएशन डी-रेटिंग ने सेक्टर पर दबाव बढ़ाया है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या AI से जुड़ी आशंकाएं वाकई कंपनियों की कमाई को प्रभावित करेंगी या मौजूदा गिरावट ओवररिएक्शन साबित होगी। फिलहाल, आईटी सेक्टर अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
