China Gold news: गोल्ड क्रैश का असर, चीन के बड़े बैंकों ने ट्रेडिंग सर्विस की बंद
punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 04:28 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः कुछ महीने पहले तक लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा था सोना अब तेज गिरावट के दौर से गुजर रहा है। इस गिरावट के बीच चीन के बड़े बैंकों ने आम निवेशकों के लिए गोल्ड और अन्य प्रीशियस मेटल्स की ट्रेडिंग सेवाएं सीमित या बंद करना शुरू कर दिया है।
इस साल की शुरुआत में सोने की कीमत 5,600 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी जो अब गिरकर 4000 डॉलर से नीचे आ गई हैं। भारतीय मूल्य में लगभग 1.97 लाख रुपए से गिरकर 1.41 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक आ गई है यानी कुछ ही महीनों में लगभग 56,000 रुपए प्रति 10 ग्राम (करीब 29%) की गिरावट दर्ज की गई है।
चीन ने क्या लिया फैसला
चीन के सबसे बड़े बैंक इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC) ने घोषणा की है कि वह 24 जुलाई के बाद से शंघाई गोल्ड एक्सचेंज से जुड़े प्रीशियस मेटल्स ट्रेडिंग प्रोडक्ट्स में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए इंटरमीडियरी सेवाएं बंद कर देगा।
इसका मतलब है कि आम निवेशक बैंक के जरिए गोल्ड और सिल्वर की डायरेक्ट ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। ग्राहकों को 24 जुलाई से पहले अपनी ओपन पोजीशन बंद करने के लिए कहा गया है। इसी तरह चाइना गुआंगफा बैंक ने भी ग्राहकों को तय समय सीमा के भीतर अपनी पोजीशन बंद करने का निर्देश दिया है, अन्यथा महीने के अंत तक उन्हें जबरन क्लोज किया जाएगा।
निवेश पर पूरी रोक नहीं
बैंकों ने साफ किया है कि पूरी तरह निवेश बंद नहीं किया जा रहा है। ग्राहक अब भी गोल्ड ETF और गोल्ड अक्यूम्युलेशन प्लान जैसे विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। केवल हाई-रिस्क ट्रेडिंग और डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स पर रोक लगाई जा रही है।
बैंक क्यों ले रहे हैं यह कदम?
विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण जोखिम बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान तनाव, ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और वैश्विक महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसी वजह से बैंकों ने जोखिम कम करने के लिए यह कदम उठाया है ताकि आम निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे फैसले
यह पहली बार नहीं है जब चीन में इस तरह की सख्ती की गई हो। इससे पहले भी कई चीनी बैंक रिटेल निवेशकों के लिए प्रीशियस मेटल्स ट्रेडिंग पर प्रतिबंध या सीमाएं लगा चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन का फोकस धीरे-धीरे संस्थागत निवेश की ओर बढ़ा है।
