Gold-Silver fall: रिकॉर्ड हाई के बाद गिरे सोने-चांदी के दाम, कीमतों ने मारा रिवर्स गियर
punjabkesari.in Tuesday, Apr 07, 2026 - 11:16 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी ने इस बार निवेशकों को निराश किया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बावजूद दोनों कीमती धातुओं में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के शुरू में सोने-चांदी में थोड़ी तेजी दिखी लेकिन इसके बाद से अबतक करीब 22 फीसदी की गिरावट इन कीमती धातुओं में आ चुकी है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले इन धातुओं ने 2026 की शुरुआत में भी तेजी दिखाई थी। जनवरी के अंत में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी 121 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे। हालांकि, युद्ध के लंबा खिंचने और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव के चलते इनकी रफ्तार थम गई।
डॉलर की मजबूती बनी बड़ी वजह
विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध के कारण तेल कीमतों में उछाल और महंगाई की आशंका बढ़ी, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ। मजबूत डॉलर की वजह से सोना-चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग प्रभावित होती है। यही कारण है कि सोने की कीमतें 16 फीसदी से ज्यादा गिरकर करीब 4,680 डॉलर प्रति औंस पर आ गई हैं, जबकि चांदी 35 फीसदी टूटकर लगभग 74 डॉलर प्रति औंस रह गई है।
ब्याज दरों का दबाव और निवेश में बदलाव
बढ़ती महंगाई की आशंका के चलते केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है। इससे निवेशकों का रुझान सोना-चांदी से हटकर अमेरिकी बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले साधनों की ओर बढ़ा है। ऊंची बॉन्ड यील्ड भी कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक साबित हो रही है।
चांदी पर औद्योगिक मांग का असर
चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट की एक बड़ी वजह इसकी औद्योगिक मांग में कमी भी है। वैश्विक अनिश्चितता के चलते कंपनियों ने निवेश और उत्पादन योजनाएं टाल दी हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो सेक्टर में मांग घटी है। चूंकि चांदी की करीब 60 फीसदी मांग उद्योगों से आती है, इसलिए इसका असर कीमतों पर साफ दिखा।
केंद्रीय बैंकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ देशों ने अपनी मुद्रा को स्थिर रखने के लिए सोने के भंडार में कटौती की है, जिससे बाजार में आपूर्ति बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना।
इतिहास भी देता है यही संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े संघर्ष की शुरुआत में सोना-चांदी में तेजी आती है, लेकिन जैसे-जैसे संकट लंबा चलता है, यह तेजी कमजोर पड़ जाती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी शुरुआती उछाल के बाद कीमतों में ठहराव देखा गया था।
विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक महंगाई के संकेत कमजोर नहीं होते और ब्याज दरों में नरमी नहीं आती, तब तक सोना-चांदी में बड़ी तेजी की संभावना कम है। फिलहाल बाजार में वित्तीय कारकों का असर भू-राजनीतिक तनाव से ज्यादा देखने को मिल रहा है।
