Economic Survey में चेतावनीः दुनिया पर मंडरा रहा महाक्रैश का खतरा! आएगा 2008 जैसा क्राइसिस

punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 03:59 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः आर्थिक सर्वे (Economic Survey) 2026 में भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने पूरी दुनिया को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। सर्वे में चेतावनी दी गई है कि साल 2026 में वैश्विक व्यवस्था के टूटने का खतरा बन सकता है और हालात 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (Economic Crisis) जैसे—या उससे भी ज्यादा खराब—हो सकते हैं। सर्वे के मुताबिक, ऐसे गंभीर संकट की संभावना 10 से 20 प्रतिशत तक आंकी गई है।

2026 के लिए दुनिया के तीन संभावित हालात

आर्थिक सर्वे में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तीन अलग-अलग परिदृश्य सामने रखे गए हैं।

सबसे अच्छा हालात (40–45% संभावना)

दुनिया 2025 जैसी स्थिति में बनी रहेगी। वैश्विक सिस्टम जुड़ा रहेगा, लेकिन पहले से ज्यादा कमजोर और नाजुक होगा। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक विवाद और वित्तीय दबाव जारी रहेंगे, हालांकि हालात और ज्यादा नहीं बिगड़ेंगे।

बीच का हालात (40–45% संभावना)

देशों के बीच टकराव बढ़ेगा। व्यापार जबरदस्ती और दबाव की नीति पर चलेगा। प्रतिबंधों की संख्या बढ़ेगी और एक देश में शुरू हुआ वित्तीय संकट आसानी से दूसरे देशों तक फैल सकता है। वैश्विक सहयोग कमजोर पड़ने का खतरा रहेगा।

सबसे खराब हालात (10–20% संभावना)

वित्तीय तनाव, तकनीकी जोखिम (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और भू-राजनीतिक संघर्ष एक साथ मिलकर बड़े संकट को जन्म दे सकते हैं। सर्वे में साफ कहा गया है कि इस स्थिति में हालात 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से भी ज्यादा भयावह हो सकते हैं।

भारत के लिए क्या मायने?

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, भारत अपनी मजबूत मैक्रो-इकोनॉमिक बुनियाद के चलते कई देशों से बेहतर स्थिति में है। वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि सर्वे ने यह भी चेताया है कि भारत पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की धीमी ग्रोथ, टैरिफ से जुड़ी बाधाएं और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव भारत के निर्यात और बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

सोने की कीमतों से मिला खतरे का संकेत

CEA ने सोने की कीमतों का उदाहरण देते हुए कहा कि 2025 में सोना 2,607 डॉलर से बढ़कर 4,315 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। यह इस बात का साफ संकेत है कि वैश्विक वित्तीय बाजार पहले से ही आने वाली अस्थिरता को महसूस कर रहे हैं। निवेशक तेजी से सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं।

सर्वे में यह भी कहा गया है कि अगर अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताएं इस साल पूरी होती हैं, तो इससे कुछ हद तक बाहरी अनिश्चितता कम हो सकती है। लेकिन कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वे ने साफ संकेत दिया है कि साल 2026 भारत और पूरी दुनिया—दोनों के लिए सतर्कता और सावधानी का साल साबित हो सकता है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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