Gold Silver ETF Crash: मेटल मार्केट में कोहराम! गोल्ड-सिल्वर ETF बुरी तरह लुढ़के
punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 06:12 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः सोने और चांदी में जारी भारी बिकवाली का असर अब एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) पर भी साफ दिखने लगा है। 2 फरवरी को गोल्ड और सिल्वर ETF में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच इंडिया VIX उछलकर 15.55 के स्तर पर पहुंच गया।
MCX पर अप्रैल एक्सपायरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स करीब 3 फीसदी टूटकर 1,43,335 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गए। यह स्तर पिछले गुरुवार बने रिकॉर्ड हाई 1,93,096 रुपए से करीब 26 फीसदी नीचे है। वहीं जून और फरवरी एक्सपायरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में भी क्रमशः 4 फीसदी और 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।
चांदी में और गहरी गिरावट
चांदी की कीमतों में गिरावट और ज्यादा तेज रही। MCX पर मार्च एक्सपायरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स करीब 6 फीसदी गिरकर 2,49,713 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गए। यह गुरुवार को बने 4,20,048 रुपए के रिकॉर्ड हाई से करीब 41 फीसदी की गिरावट को दर्शाता है। मई एक्सपायरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स में भी लगभग 6 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।
गोल्ड-सिल्वर ETF में भारी टूट
कीमतों में तेज गिरावट का असर ETF पर भी दिखा। Edelweiss Silver ETF और Axis Silver ETF करीब 20 फीसदी टूट गए। UTI, DSP, Aditya Birla Sun Life और Kotak Silver ETF में भी लगभग 20 फीसदी की गिरावट आई। Mirae Asset, Motilal Oswal, 360 ONE और HDFC Silver ETF करीब 19 फीसदी नीचे रहे, जबकि ICICI Prudential, Nippon India, SBI और Tata Silver ETF में 18 फीसदी तक की कमजोरी देखने को मिली।
गोल्ड ETF की बात करें तो Birla Sun Life Gold ETF और Motilal Oswal Gold ETF 9 फीसदी से ज्यादा गिरे। ICICI Prudential और Mirae Asset Gold ETF करीब 8 फीसदी टूटे। Edelweiss, HDFC, Baroda BNP Paribas और Nippon India GoldBees में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट की बड़ी वजहें
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और US Fed के हॉकिश रुख से जुड़ी खबरें प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा CME Group द्वारा मेटल फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ाने का फैसला भी बाजार पर भारी पड़ा है। COMEX गोल्ड फ्यूचर्स का मार्जिन 6 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी और 5000 सिल्वर फ्यूचर्स का मार्जिन 11 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है, जो सोमवार से लागू होगा।
एक्सपर्ट्स की राय
Bonanza के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि शॉर्ट टर्म में भले ही उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लॉन्ग टर्म आउटलुक अभी भी बुलिश है। रिकॉर्ड केंद्रीय बैंक खरीद, चांदी में लगातार सप्लाई डिफिसिट और भू-राजनीतिक तनाव कीमतों को सपोर्ट दे सकते हैं।
मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) के ETF फंड मैनेजर सिद्धार्थ श्रीवास्तव के मुताबिक, चांदी में पैराबोलिक तेजी के बाद सतर्कता जरूरी है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि वे पोर्टफोलियो को लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक एलोकेशन के मुताबिक री-अलाइन करें और फिलहाल ट्रेंड कन्फर्मेशन का इंतजार करें।
