Britannia की ब्रेड और शांगरी-ला होटल पर CCPA का एक्शन, लगाया 1-1 लाख रुपए का जुर्माना
punjabkesari.in Monday, Oct 26, 2026 - 04:06 PM (IST)
नई दिल्लीः केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापन और ग्राहकों से अनिवार्य सेवा शुल्क वसूलने के मामलों में दो अलग-अलग कार्रवाई करते हुए ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और दिल्ली स्थित शांगरी-ला इरोस होटल के रेस्तरां ‘मिस्टर चाय’ पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने दोनों मामलों में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संबंधित निर्देश भी जारी किए हैं।
ब्रिटानिया की ब्रेड पर 100% गेहूं का दावा भ्रामक
CCPA ने ब्रिटानिया की ‘100 प्रतिशत होल व्हीट ब्रेड’ के विज्ञापन को भ्रामक मानते हुए कंपनी पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण के 22 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक, उत्पाद में गेहूं के आटे की मात्रा केवल 62 प्रतिशत थी, जबकि शेष 38 प्रतिशत में चावल की भूसी सहित अन्य सामग्री शामिल थी।
प्राधिकरण ने कहा कि ‘100 प्रतिशत’ का दावा उपभोक्ताओं को यह धारणा देता है कि ब्रेड पूरी तरह गेहूं से बनी है। कंपनी ने जांच के दौरान भी स्वीकार किया कि उत्पाद में गेहूं के आटे की मात्रा 62 प्रतिशत है। इसके बावजूद विज्ञापनों में 100 प्रतिशत होल व्हीट का दावा किया गया।
CCPA ने कंपनी को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया सहित सभी माध्यमों पर संबंधित विज्ञापन तत्काल बंद करने तथा 15 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। प्राधिकरण के अनुसार, यह दावा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
मिस्टर चाय पर जबरन सर्विस चार्ज लगाने का आरोप
दूसरे मामले में CCPA ने शांगरी-ला इरोस होटल के रेस्तरां ‘मिस्टर चाय’ पर ग्राहकों के बिल में जबरन 10 प्रतिशत सेवा शुल्क जोड़ने के मामले में एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण को 30 मई और 10 जून, 2025 को मिली शिकायतों में ग्राहकों ने अनिवार्य सेवा शुल्क वसूले जाने का आरोप लगाया था।
22 अक्टूबर के आदेश में रेस्तरां को स्वतः या किसी अन्य नाम से सेवा शुल्क लगाने अथवा वसूलने से रोकने और 15 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
सेवा शुल्क देना ग्राहक की इच्छा पर निर्भर
CCPA ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 मार्च, 2025 के फैसले में रेस्तरां के लिए प्राधिकरण के सेवा शुल्क संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य बताया था। इसके बावजूद रेस्तरां द्वारा शुल्क वसूलना जारी रखा गया।
प्राधिकरण के अनुसार, मेन्यू में सेवा शुल्क को वैकल्पिक बताना या भुगतान के बाद उसे लौटाने की पेशकश करना इस प्रथा को वैध नहीं बनाता। दिशानिर्देशों के तहत सेवा शुल्क स्वतः नहीं लगाया जा सकता और इसका भुगतान स्वैच्छिक होना चाहिए। आदेश के मुताबिक, रेस्तरां ने एक अक्टूबर, 2026 से सेवा शुल्क लगाना बंद कर दिया था लेकिन पहले नियमों का पालन नहीं करने के कारण उस पर जुर्माना लगाया गया।
