ITR देर से भरने पर हर मामले में नहीं लगेगा जुर्माना, ITAT ने रद्द की ₹4 लाख की पेनाल्टी
punjabkesari.in Saturday, Oct 24, 2026 - 05:25 PM (IST)
मुंबईः इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) समय पर दाखिल नहीं करने और विभाग का नोटिस मिलने के बाद रिटर्न भरने पर हर मामले में जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। मुंबई स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक मामले में करीब 4 लाख रुपए का जुर्माना रद्द करते हुए यह स्पष्ट किया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि नोटिस के जवाब में पहली बार रिटर्न दाखिल करना अपने आप में आय छिपाने या कम बताने का सबूत नहीं है।
यह मामला एक जहाज के कैप्टन से जुड़ा है, जिन्होंने तय समयसीमा में अपना ITR दाखिल नहीं किया था। बाद में इनकम टैक्स विभाग को उनके 1.4 करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदने, वेतन और ब्याज से हुई कमाई की जानकारी मिली। इसके बाद विभाग ने इनकम टैक्स कानून की धारा 148 के तहत नोटिस जारी कर पुराने कर निर्धारण मामले को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू की।
31.6 लाख रुपए की आय घोषित की
नोटिस मिलने के बाद करदाता ने करीब 31.6 लाख रुपए की कुल आय घोषित करते हुए रिटर्न दाखिल किया। उन्होंने संपत्ति खरीदने के लिए जुटाई गई रकम के स्रोत के समर्थन में बैंक स्टेटमेंट, होम लोन के दस्तावेज और निवेश बेचकर मिली राशि का ब्योरा भी दिया। करदाता ने बताया कि संपत्ति खरीदने में होम लोन और निवेश से प्राप्त रकम का इस्तेमाल किया गया था। वहीं, उनके वेतन पर पहले ही टैक्स कटौती हो चुकी थी।
विभाग ने करदाता की घोषित आय को स्वीकार कर लिया और उसमें कोई अतिरिक्त आय नहीं जोड़ी। इसके बावजूद अधिकारी ने आय की अंडर-रिपोर्टिंग का मामला मानते हुए धारा 270A के तहत करीब 4 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया। पहली अपीलीय अथॉरिटी से राहत नहीं मिलने पर करदाता ने ITAT का रुख किया।
आय में बढ़ोतरी नहीं, फिर भी लगा था जुर्माना
ट्रिब्यूनल ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए जुर्माना रद्द कर दिया। उसने पाया कि करदाता की वेतन आय की जानकारी विभाग के पास पहले से थी और संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत भी बताए गए थे। ऐसे में केवल नोटिस के बाद रिटर्न दाखिल करने के आधार पर घोषित आय को कम बताई गई आय नहीं माना जा सकता।
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले में अतिरिक्त टैक्स की मांग नहीं होने से जुर्माना अपने आप गलत नहीं हो जाता। फैसला संबंधित तथ्यों और कानून के प्रावधानों के आधार पर किया जाना चाहिए। यह आदेश उन करदाताओं के लिए अहम है, जिन पर देर से रिटर्न दाखिल करने के कारण जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, आय छिपाने या गलत जानकारी देने के मामलों में कार्रवाई संभव है।
