Bisleri बनाम Aquapeya: ट्रेडमार्क विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
punjabkesari.in Wednesday, Apr 02, 2025 - 05:43 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः भारतीय पैकेज्ड वॉटर इंडस्ट्री में ट्रेडमार्क विवाद ने तूल पकड़ लिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में स्टार्टअप Aquapeya को बिसलेरी इंटरनेशनल के ट्रेडमार्क और कॉपीराइट उल्लंघन के मामले में उत्पादन और बिक्री रोकने का आदेश दिया है। इस फैसले ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व को फिर से उजागर कर दिया है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
Aquapeya एक उभरता हुआ पैकेज्ड वॉटर ब्रांड है, जिसने शार्क टैंक इंडिया सीजन 4 में भाग लिया था। जनवरी में प्रसारित एक एपिसोड में इस स्टार्टअप को नमिता थापर और रितेश अग्रवाल से ₹70 लाख की फंडिंग मिली थी। इस डील के तहत 3% इक्विटी और 1% रॉयल्टी तय की गई थी, जिससे इसका कुल मूल्यांकन ₹23.33 करोड़ हो गया था।
फरवरी 2025 में बिसलेरी इंटरनेशनल ने बॉम्बे हाई कोर्ट में Aquapeya के निर्माता Natvits Beverages के खिलाफ ट्रेडमार्क और कॉपीराइट उल्लंघन का केस दायर कर दिया। बिसलेरी का आरोप था कि Aquapeya की पैकेजिंग और ट्रेडमार्क उनकी ब्रांडिंग से काफी मिलते-जुलते हैं, जिससे ग्राहक भ्रमित हो सकते हैं।
कोर्ट का फैसला क्या रहा?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बिसलेरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए Aquapeya को अपने उत्पादों की बिक्री और उत्पादन तुरंत रोकने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि किसी भी प्रतिस्पर्धी बाजार में नए खिलाड़ियों को मौजूदा ब्रांडों की पहचान की नकल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
बिसलेरी की आपत्ति क्यों?
- बिसलेरी भारत का सबसे बड़ा पैकेज्ड वॉटर ब्रांड है, जिसकी बाजार में मजबूत पहचान है।
- कंपनी का दावा है कि Aquapeya की पैकेजिंग और ब्रांडिंग उससे काफी मिलती-जुलती है।
- ग्राहकों के लिए दोनों ब्रांड में फर्क करना मुश्किल हो सकता है, जिससे ब्रांड वैल्यू पर असर पड़ सकता है।
स्टार्टअप के लिए बड़ा झटका
Aquapeya के लिए यह कोर्ट का आदेश बड़ा झटका साबित हुआ है।
- कंपनी ने हाल ही में निवेशकों से महत्वपूर्ण फंडिंग हासिल की थी।
- यह मामला दर्शाता है कि बाजार में उतरने से पहले बौद्धिक संपदा अधिकारों का पालन करना कितना जरूरी है।