Russia's Big decision: भारत को तेल सप्लाई पर रूस का नया कदम, आखिर क्या लिया बड़ा फैसला?
punjabkesari.in Saturday, Mar 07, 2026 - 10:58 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः रूस ने भारत को होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक अहम फैसला लिया है। मॉस्को ने स्पष्ट किया है कि वह भारत को भेजे जाने वाले तेल की मात्रा सार्वजनिक नहीं करेगा। रूस का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए इन आंकड़ों को गोपनीय रखना जरूरी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।
आंकड़े छिपाने के पीछे वजह
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि भारत को निर्यात किए जाने वाले तेल से जुड़े आंकड़े अब सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उनके अनुसार दुनिया में कई देश और समूह ऐसे हैं जो रूस के ऊर्जा व्यापार पर नजर रखे हुए हैं और उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए निर्यात से जुड़े आंकड़ों को गोपनीय रखना रूस के हित में है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल हाल ही में अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी गई है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत को होने वाली रूसी तेल आपूर्ति को लेकर कई रिपोर्टें सामने आईं। इनमें यह भी दावा किया गया कि रूस एक सप्ताह में भारत को लगभग 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करने की क्षमता रखता है। हालांकि रूस ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।
इस बीच रूसी सरकारी मीडिया में जारी एक मानचित्र ने भी हलचल बढ़ा दी। रिपोर्ट में अरब सागर से बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते कई तेल टैंकर दिखाए गए, जिन्हें भारत के पूर्वी तट की रिफाइनरियों की ओर जाते हुए बताया गया। इससे यह संकेत मिला कि रूस से भारत की ओर कच्चे तेल की आपूर्ति जारी है लेकिन रूस ने इसकी सटीक मात्रा बताने से परहेज किया है।
भारत-चीन को बढ़ सकती है तेल आपूर्ति
रूस के उप प्रधानमंत्री Alexander Novak ने भी संकेत दिया है कि उनका देश भारत और चीन जैसे बड़े ग्राहकों को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz से तेल परिवहन में आई बाधाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे में रूस एशियाई देशों के साथ अपने ऊर्जा व्यापार को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और गहरा हो सकता है।
