AI से इतिहास का सबसे बड़ा अवसंरचना निर्माण शुरू, खरबों डॉलर निवेश की जरूरत: जेनसन हुआंग

punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 01:48 PM (IST)

नई दिल्लीः अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी एनवीडिया के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जेनसन हुआंग ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) मानव इतिहास में ''सबसे बड़े अवसंरचना निर्माण'' को गति दे रही है, जिसके लिए खरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी और कुशल श्रमिकों की भारी मांग उत्पन्न होगी। हुआंग ने हाल ही में प्रकाशित एक ब्लॉग लेख में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) अब केवल एक साधारण अनुप्रयोग या एकल मॉडल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसे बिजली एवं इंटरनेट की तरह एक आवश्यक अवसंरचना के रूप में देखना चाहिए। 

उन्होंने लिखा, ''हमने अभी इस निर्माण की शुरुआत ही की है। अब तक इसमें कुछ सौ अरब डॉलर का निवेश हुआ है, जबकि अब भी खरबों डॉलर की अवसंरचना तैयार की जानी बाकी है। दुनिया भर में अभूतपूर्व स्तर पर चिप कारखाने, कंप्यूटर 'असेंबल' संयंत्र और कृत्रिम मेधा (एआई) कारखाने बनाए जा रहे हैं। यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा अवसंरचना निर्माण बनता जा रहा है।'' हुआंग ने कृत्रिम मेधा (एआई) का ''पांच परतों वाले ढांचे'' के रूप उल्लेख किया जिसमें ऊर्जा, चिप, अवसंरचना, मॉडल और अनुप्रयोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा इसकी आधारभूत परत है और यह इस बात की प्रमुख सीमा तय करती है कि कोई प्रणाली कितनी बुद्धिमत्ता उत्पन्न कर सकती है। एनवीडिया प्रमुख ने कहा कि यह विशाल औद्योगिक बदलाव पारंपरिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र के बाहर भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करेगा।

उन्होंने कहा, ''इस निर्माण को समर्थन देने के लिए श्रम की जरूरत बहुत अधिक है। कृत्रिम मेधा (एआई) कारखानों को बिजली मिस्त्री, प्लंबर, पाइप फिट करने वाले कारीगर, इस्पात कर्मी, नेटवर्क तकनीशियन, संयोजन करने वाले कर्मचारी और संचालक चाहिए होंगे। ये सभी कुशल और अच्छे वेतन वाली नौकरियां हैं, जिनकी अभी कमी है। इस बदलाव में भाग लेने के लिए कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी करने की आवश्यकता नहीं है।'' हुआंग ने बताया कि कृत्रिम मेधा (एआई) ने पारंपरिक कंप्यूटिंग मॉडल को बदल दिया है, जो पहले संरचित आंकड़ों और सटीक प्रश्नों पर आधारित था। उन्होंने कहा, ''अब हर उत्तर नया होता है। हर जवाब आपके संदर्भ पर निर्भर करता है। यह ऐसा सॉफ्टवेयर नहीं है जो केवल संग्रहित निर्देशों को पेश करे बल्कि यह मांग के अनुसार तर्क करके बुद्धिमत्ता प्रदान करता है।'' 

ब्लॉग में यह भी कहा गया कि पिछले वर्ष कृत्रिम मेधा (एआई) ने एक महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है क्योंकि मॉडल बड़े पैमाने पर अत्यधिक उपयोगी हो गए हैं और दवा खोज, लॉजिस्टिक, ग्राहक सेवा, सॉफ्टवेयर विकास तथा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में वास्तविक आर्थिक मूल्य उत्पन्न कर रहे हैं। हुआंग ने मुक्त स्रोत मॉडल, विशेष रूप से डीपसीक-आर1 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे अनुप्रयोग स्तर पर अपनाने की गति तेज हुई है जिसके परिणामस्वरूप अवसंरचना एवं ऊर्जा सहित पूरी कंप्यूटिंग प्रणाली में मांग बढ़ रही है। 
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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