Budget 2026 से पहले पर्सनल टैक्स में बदलाव की मांग, ICAI ने सरकार को दिए अहम सुझाव
punjabkesari.in Saturday, Jan 10, 2026 - 02:07 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः बजट 2026 से पहले करदाताओं की उम्मीदों के बीच भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) ने पर्सनल टैक्स से जुड़े कई अहम बदलावों की सिफारिश की है। ICAI ने वित्त मंत्रालय को सौंपे गए अपने प्री-बजट मेमोरेंडम में डिफॉल्ट टैक्स रिजीम, सरचार्ज की सीमा और रिटेल टैक्सपेयर्स को मिलने वाली कटौतियों की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।
संस्थान का कहना है कि नई डिफॉल्ट टैक्स रिजीम ने टैक्स स्लैब को जरूर सरल बनाया है लेकिन इसके साथ कई ऐसी महत्वपूर्ण कटौतियां खत्म हो गई हैं जो परिवारों की वित्तीय सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं। ICAI ने सरकार से इस संतुलन पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन देने की सिफारिश
ICAI ने डिफॉल्ट टैक्स रिजीम में हेल्थ इंश्योरेंस (मेडिक्लेम) से जुड़ी कटौती को शामिल करने का सुझाव दिया है। फिलहाल नई रिजीम चुनने वाले टैक्सपेयर्स को मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम या मेडिकल खर्च पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती। संस्थान का मानना है कि इससे ऐसे समय में हेल्थ इंश्योरेंस लेने की प्रवृत्ति कम हो सकती है, जब जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसलिए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम और कुछ तय चिकित्सा खर्चों पर डिडक्शन देने की जरूरत बताई गई है।
दिव्यांगों और आश्रितों के लिए राहत की मांग
ICAI ने दिव्यांग व्यक्तियों और दिव्यांग आश्रितों की देखभाल करने वाले टैक्सपेयर्स को राहत देने की भी सिफारिश की है। संस्थान ने सुझाव दिया है कि दिव्यांगता से जुड़ी कटौतियों को डिफॉल्ट टैक्स रिजीम में शामिल किया जाए और बढ़ती महंगाई व देखभाल लागत को देखते हुए इनकी सीमा भी बढ़ाई जाए।
सरचार्ज सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
संस्थान ने सरचार्ज को लेकर भी चिंता जताई है। ICAI के मुताबिक, नई टैक्स रिजीम में आय की गणना बिना किसी छूट और डिडक्शन के होती है, जिससे कई टैक्सपेयर्स वास्तविक आय में बढ़ोतरी के बिना ही सरचार्ज की सीमा पार कर जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए ICAI ने व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए सरचार्ज की सीमा 50 लाख रुपए से बढ़ाकर कम से कम 75 लाख रुपए करने का प्रस्ताव रखा है।
शादीशुदा जोड़ों के लिए जॉइंट ITR का सुझाव
ICAI ने शादीशुदा जोड़ों के लिए एक वैकल्पिक जॉइंट टैक्स रिटर्न सिस्टम शुरू करने का भी सुझाव दिया है। इसके तहत पति-पत्नी एक साथ एक ही आयकर रिटर्न दाखिल कर सकेंगे और उन्हें अनुपातिक रूप से अधिक छूट और बेहतर टैक्स स्लैब का लाभ मिल सकेगा। संस्थान का कहना है कि इससे एकल आय वाले परिवारों की वित्तीय स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सकेगा और आय के कृत्रिम विभाजन की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।
