नफरत और विभाजन की राजनीति देश के लिए विनाशकारी

punjabkesari.in Friday, May 06, 2022 - 03:57 AM (IST)

मेरा उन 200 प्रमुख सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, नौकरशाहों और सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ कोई झगड़ा नहीं है जो हमारे प्रधानमंत्री के पक्ष में तथा संघ परिवार के साथ मिलकर पिछले सप्ताह प्रकाशित हमारे समूह सी.सी.जी. (संवैधानिक आचरण समूह) के जवाब में सार्वजनिक पत्र के साथ उतरे हैं। इससे पहले कि मैं अपने रुख के बारे में विस्तार से बताऊं, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरे विचार आई.ए.एस., आई.एफ.एस., आई.पी.एस. व अन्य केंद्रीय सेवाओं के 107 अन्य पूर्व सहयोगियों के समान नहीं हो सकते, जिन्होंने सी.सी.जी. के पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। 100 से अधिक आवाजों में एक समान विचारों की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। 

मुझे उन 200 के खिलाफ कोई रंज क्यों नहीं है इसका कारण यह है कि उन्हें भी जनमत को प्रभावित करने का अधिकार है, जैसा कि मेरा समूह चाहेगा। मेरे अपने विस्तारित परिवार में कई आवाजें और राय सुनी जाएंगी और मेरे दोस्तों के सर्कल में भी। इस्लामिक उन्माद का मुकाबला करने के लिए धार्मिक उत्साह निश्चित रूप से 2014 के बाद से चरम पर है। 

मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि 200 के समूह ने हमारे इरादों पर सवाल उठाया है। मैं अपने सपने में कभी भी नहीं सोच सकता कि कोई भी, विशेष रूप से पूर्व सहयोगी हमारे उद्देश्यों पर प्रश्र उठाएंगे। यह आरोप लगाया गया था कि हम एक समूह के रूप में देश में अविश्वास फैलाने और अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे इरादों के बारे में इससे ज्यादा हास्यास्पद कुछ नहीं कहा जा सकता। मैं वास्तव में चिंतित हूं (और आश्वस्त भी) कि नफरत और विभाजन की राजनीति का अनुसरण करना इस महान देश के लिए विनाश का कारण बनता है। यह अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा, जिसे लेकर हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री बहुत चिंतित हैं। जब अशांति सड़कों पर जीवन की एक सामान्य विशेषता बन जाती है तो निवेशकों और व्यापारियों की भावनाएं प्रभावित होती हैं। 

इससे भी बदत्तर है हमारे सुरक्षा माहौल पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव। यदि देश में सबसे बड़े अल्पसंख्यकों को उनकी आजीविका के साधनों और उनकी धार्मिक प्रथाओं पर व्यवस्थित हमलों के माध्यम से अलग-थलग कर दिया जाता है, जो रोजमर्रा की घटनाएं हो गई हैं, तो खुफिया तंत्र तथा सड़कों पर वर्दीधारी पुलिस कर्मियों की निगरानी के बावजूद भी कोई बड़ा निवेश प्राप्त नहीं होगा। 200 के समूह का गठन करने वाले मेरे पूर्व सहयोगियों का आरोप है कि मेरा समूह ‘वास्तव में नफरत की राजनीति को हवा दे रहा है और वे वर्तमान सरकार के खिलाफ पैदा की गई नफरत से लडऩा चाहते हैं।’ शायद कुछ लोग, जिन्होंने खुफिया ब्यूरो या अन्य खुफिया एजैंसी में काम किया है, सरकारों (वास्तव में हर सरकार) द्वारा जरूरत पडऩे पर ‘गंदी चाल’ का इस्तेमाल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सी.सी.जी. से पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों में से किसी को ऐसा अनुभव नहीं है। 

जेहादी आतंकवाद निरंतर सिरदर्द बना हुआ है। भारत एक राष्ट्र के तौर पर इस खतरे का सामना करने में कभी भी असफल नहीं हुआ, चाहे कोई भी दल सत्ता में हो। यह विश्वास कि एक धर्म ही एकमात्र सत्य है (जो वह नहीं है) बहुत गलतफहमी का कारण है। यह समस्या तब तक जारी रहेगी जब तक शिक्षा और ज्ञान इस तरह की धारणाओं को दूर नहीं कर देते। इस्लाम में हिजाब पहनने जैसी कई प्रथाएं आधुनिक संस्कृतियों के लिए घृणित हैं लेकिन दमन और कानून ऐसी प्रथाओं को खत्म नहीं करेंगे। 

विभाजन के बारे में आक्रोश तथा विभाजन में महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू की मिलीभगत ने गांधी जी की जान ले ली। प्रज्ञा ठाकुर जैसे चरमपंथियों को संघ का साथ मिला। गांधी जी के हत्यारे का महिमामंडन करने के प्रयास जारी हैं और अंतत: यदि एक हिंदू राष्ट्र की घोषणा की जाती है तो यह सफल भी हो सकता है। वह दिन आने पर मेरी आत्मा मर जाएगी। यदि विभाजन नहीं हुआ होता तो एक परिदृश्य यह होता कि हिंदू-मुस्लिम अनुपात वर्तमान के 80:20 की तुलना में 60: 40 के करीब होता, जिसकी बात योगी आदित्यनाथ करते हैं। क्या ऐसे मामले में कानून व्यवस्था को बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकता है? यदि मुसलमानों की आबादी 40 प्रतिशत है तो क्या जेहादी आतंक पर बेहतर नियंत्रण होगा? मैं इस काल्पनिक प्रश्र का उत्तर नहीं दे सकता लेकिन 200 के समूह में मेरे मित्रों को संभावनाओं पर विचार करना चाहिए। 

मैं अपने पूर्व सहयोगियों पर किसी घटिया इरादे का आरोप नहीं लगाना चाहता। चूंकि वे सत्ता में बैठे लोगों की सोच को प्रभावित करने के लिए 108 के समूह से बेहतर स्थिति में हैं, मैं उनसे मोदी जी और अमित शाह जी के साथ उनके प्रभाव का इस्तेमाल करके संघ के ‘तूफानी सैनिकों’ को हमारे मुस्लिम भाइयों और बहनों को पीड़ा देने से रोकने के लिए आदेश देने की अपील करता हूं। मोदी समर्थक और मोदी विरोधी विचार हिंदुओं में लगभग समान रूप से विभाजित हैं। कई वर्षों से मेरे हिंदू मित्रों की यही स्थिति है। मुझे लगता है कि कई ऐसे भी हैं जो एक ईसाई मित्र की उपस्थिति में चुप रहना पसंद करते हैं। मैं उनका भी सम्मान करता हूं। 

भारत में हमारे मुस्लिम भाइयों के उत्पीडऩ के खिलाफ ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स’ नामक संस्था दृढ़ता से सामने आई है। वे दुनिया भर के विभिन्न धर्मों या समुदाय आधारित संगठनों से संबंधित हैं, मुख्य रूप से अमरीकी। मैं ङ्क्षहदू धर्म के इन सच्चे अनुयायियों को सलाम करता हूं, जीवन का एक तरीका जिससे गोवा में मेरे पूर्वज संबंधित थे। उनके खुले पत्र ने मुझे आश्वस्त किया है कि सी.सी.जी. न्याय और करुणा की पुकार में अकेला नहीं है।-जूलियो रिबैरो(पूर्व डी.जी.पी. पंजाब व पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी)
 


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