क्या किंग मेकर से किंग बनने की ओर प्रशांत किशोर?
punjabkesari.in Thursday, Jul 09, 2026 - 03:56 AM (IST)
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसफ विजय की जीत के रणनीतिकार माने जाने वाले प्रशांत किशोर अब खुद पहली बार चुनाव मैदान में उतर गए हैं। वह बिहार के बांकीपुर से विधानसभा का उप चुनाव लड़ेंगे। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली हुई है। तमिलनाडु में चमत्कारी ढंग से विजय की पार्टी टी.वी.के. की जीत के बाद प्रशांत किशोर ने खूब वाहवाही लूटी। वैसे इस तरह का चमत्कार पहले भी वह बंगाल, बिहार, पंजाब और कई अन्य राज्यों में दिखा चुके हैं। उनकी रणनीति को क्षेत्रीय पाॢटयों की जीत की गारंटी माना जाता है लेकिन उनकी अपनी जन सुराज पार्टी का रिकार्ड कुछ अच्छा नहीं रहा। 2025 में उनकी पार्टी बड़े जोशो-खरोश के साथ पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव में उतरी और बुरी तरह पराजित हुई। प्रशांत अब उप चुनाव में कौन कोई कमाल दिखा पाएंगे?
दांव पर राजनीति : बांकीपुर उप चुनाव में प्रशांत किशोर के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प जरूर हो गया है। करीब 30 वर्षों से इस सीट पर नितिन नबीन परिवार का कब्जा रहा है। नितिन नबीन 5 बार और उनसे पहले उनके पिता 4 बार इस क्षेत्र से जीत चुके हैं। भाजपा ने इस बार एक नए चेहरे अभिषेक कुमार को मैदान में उतारने की घोषणा की है। अभिषेक कुमार कायस्थ हैं और नितिन नबीन के करीबी माने जाते हैं। वह भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। राजद ने अपनी पुरानी उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता को फिर टिकट दिया है, जो 2025 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रही थीं।
2025 के चुनाव में भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को इस क्षेत्र में 98,299 वोट मिले थे। उनका वोट शेयर लगभग 62.66 प्रतिशत था। रेखा कुमारी 46,363 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को सिर्फ 7,717 वोट मिले थे। उनका वोट शेयर लगभग 4.9 प्रतिशत था। ऐसे में चर्चा हो रही है कि जन सुराज के लिए अत्यंत कमजोर साबित सीट पर प्रशांत किशोर खुद को दांव पर क्यों लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनावों में बुरी तरह हार के बाद प्रशांत किशोर का राजनीतिक भविष्य हाशिए पर जा चुका है। ऐसे में खुद को प्रासंगिक बनाए रखना प्रशांत की सबसे बड़ी चुनौती है।
किंग मेकर सीट : बांकीपुर, जिसका नाम पहले पटना वैस्ट था, बिहार की राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। कहते हैं कि इस सीट से जीतने वाले के सिर पर ताज जरूर सजता है। नितिन नबीन इस सीट से विधायक बने। उसी से उनके भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का रास्ता खुला। 1962 में इस सीट से कांग्रेस के कृष्ण बल्लभ सहाय जीते और बाद में मुख्यमंत्री बने। 1967 में इसी सीट से महामाया प्रसाद सिन्हा जीते और मुख्यमंत्री बने। 1977 में इस सीट पर भाजपा के ठाकुर प्रसाद जीते, बाद में उन्हें राज्य में मंत्री बनने का मौका मिला। वह भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार किए जाते हैं और उनके बेटे रविशंकर प्रसाद को भी केंद्र में मंत्री बनने का मौका मिला।
यह अलग बात है कि 2020 में मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा ने भी कांग्रेस का दामन थाम कर जीत की कोशिश की लेकिन विफल रहे। इस सीट पर कायस्थों का बोल-बाला रहा है। अनुमान है कि इस क्षेत्र में कायस्थ करीब 13 प्रतिशत के आसपास हैं लेकिन राजपूत 8 प्रतिशत, भूमिहार 7 प्रतिशत, ब्राह्मण 5 प्रतिशत मिलाकर सवर्ण आबादी करीब 35 प्रतिशत हो जाती है। 1995 के बाद से भाजपा की जीत में सवर्ण मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। दलित आबादी करीब 8 प्रतिशत, मुस्लिम 8 प्रतिशत और यादव 12 प्रतिशत हैं (करीब 30 प्रतिशत)। इसलिए आजकल मुकाबला भाजपा और राजद के बीच ही होता है। कुल मतदाता करीब 3.80 लाख हैं लेकिन 2025 के चुनाव में 1 लाख 55 हजार, यानी लगभग 41 प्रतिशत ने ही मतदान किया।
जीत बनाम रणनीति : प्रशांत किशोर कई राज्यों में क्षेत्रीय नेताओं को रणनीतिकार के रूप में चुनाव जीतने में मदद कर चुके हैं। 2012 में गुजरात में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विधानसभा चुनाव से उनका रणनीतिकार का सफर शुरू हुआ। 2014 में उन्होंने नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय चुनाव अभियान का मोर्चा संभाला और देश भर में चॢचत हुए। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुनाव की रणनीति 2015 में प्रशांत किशोर ने ही बनाई थी। तब नीतीश भाजपा का दामन छोड़ कर राजद गठबंधन के साथ चुनाव लड़े थे। सबसे ताजा उदाहरण तमिलनाडु का है, जहां नई-नवेली पार्टी टी.वी.के. की जीत का सेहरा भी प्रशांत किशोर के सिर पर बांधा गया। प्रशांत अब तक 9 चुनावों की बागडोर संभाल चुके हैं, जिनमें से 8 में जीत मिली। लेकिन 2025 बिहारविधान सभा के चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी को मतदाताओं ने नकार दिया। उसके बाद भी प्रशांत ने ऐसे क्षेत्र से चुनाव लडऩे का फैसला किया, जिसे उनके अनुकूल नहीं कहा जा सकता। इस सीट को बिहार में बहुत भाग्यशाली माना जाता है। कहा जा रहा है कि इस सीट के जरिए प्रशांत किंग मेकर से किंग बनने की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं।-शैलेश कुमार
