अक्षय तृतीया की कथा के साथ पढ़ें महत्व, बन जाएं पुण्यकर्मों के भागी

Wednesday, April 26, 2017 1:04 PM
अक्षय तृतीया की कथा के साथ पढ़ें महत्व, बन जाएं पुण्यकर्मों के भागी

हमारे धार्मिक ग्रंथों में अक्षय तृतीया के संबंध में कई कथाएं प्रसिद्घ हैं। भविष्य पुराण के अनुसार शाकल नामक स्थान पर एक धर्म नाम का धर्मात्मा बनिया रहता था। धर्मपरायण, सत्यवादी और दयालु बनिया बड़ा निर्धन था जिस कारण वह सदा परेशान एवं चिंतित रहता था परंतु अक्षय तृतीया को गंगा के तट पर जाकर  पितरों का विधिवत र्तपण करता तथा घर आकर अन्न, सत्तू ,चावल,चीनी आदि का पात्र भरकर, वस्त्र और दक्षिणा सहित ब्राह्मण को सच्चे भाव से संकल्प  करके जरुर देता था। जीवन में उसकी परेशानियां तो समाप्त नहीं हुई परंतु कुछ समय बाद उसका देहांत हो गया। उसका अगला जन्म कुशावती नगरी के साधन संपन्न क्षत्रिय परिवार में हुआ। अक्षय तृतीया पर किए गए शुभकर्मों के  प्रभाव से वह बड़ा रुपवान , धर्म परायण एवं  परोपकारी राजा बना। उसने अपने राज्यकाल में भी ब्राह्मणों को अन्न,भूमि, गाय और स्वर्ण का दान दिया। उसे अपने पूर्वजन्म में किए गए सत्कर्मों का फल अक्षयफल के रुप में मिला। इसीलिए जो लोग अक्षय तृतीया  पर शुभकर्म करते हैं उनके  पुण्यकर्मों का कभी क्षय नहीं होता।


अक्षय तृतीया के दिन की महिमा
इसी दिन से सत्युग और त्रेता युग का आरम्भ हुआ।

सृष्टि के रचयिता श्री ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण हुआ।

मां अन्नपूर्णा का जन्म हुआ। 

महर्षि परशुराम जी की जयंती भी इसी दिन है।

भागीरथी मां गंगा का अवतरण भी इसी दिन हुआ।

धन के देवता श्रीकुबेर जी को इसी दिन खजाना मिला था।

भगवान श्रीकृष्ण के बचपन के मित्र सुदामा का मिलन भी इसी दिन होना एक शुभ संकेत है।

महाभारतकाल में जब दुर्योध्न ने द्रोपदी का चीरहरण किया था तो उस दिन अक्षय तृतीया थी और भगवान श्रीकृष्ण ने द्रोपदी की पुकार सुनकर उसकी रक्षा की थी। 

चारों धाम की यात्रा का मुख्य स्थल श्रीबद्रीनाथ मंदिर के कपाट भी अक्षय तृतीया को ही खुलते हैं। जब लाखों की संख्या में भक्त मंदिर में श्रीबद्रीनारायण जी के दर्शन करते हैं। 

इसी दिन भक्तों को बृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में भगवान के श्रीविग्रह स्वरुप में चरणों के दर्शन करवाए जाते हैं।

वीना जोशी
veenajoshi23@gmail.com 



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