आज से आरंभ हुए पंचक, शुभ-अशुभ काम करने से पहले बरतें सावधानी!

Tuesday, August 8, 2017 9:42 AM
आज से आरंभ हुए पंचक, शुभ-अशुभ काम करने से पहले बरतें सावधानी!

मंगलवार दिनांक 08.08.17 को प्रातः 03 बजकर 33 मिनट पर चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, इसी के साथ पंचक प्रारंभ हो जाएंगे तथा रविवार दिनांक 13.08.17 तक पंचक दोष रहेगा। ज्योतिषशास्त्र के पंचांग खंड अनुसार जब चंद्रमा 27 नक्षत्रों में से अंतिम पांच नक्षत्रों अर्थात धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, व रेवती में होता है तो उस अवधि को पंचक कहते है। इसके कारण विशेष मुहूर्त दोष बनता है जिसमे कुछ कार्य करना मना है।  शास्त्रों में केवल कुछ विशेष कार्यों को ही पंचक के दौरान न करने की सलाह दी गयी है। पंचक के दौरान मुख्य रूप से इन पांच कामों को वर्जित किया गया है। 


पंचक में वर्जित कार्य
पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करना वर्जित है। मान्यतानुसार पंचक में शवदाह करने से कुटुंब या क्षेत्र में पांच लोगों की मृत्यु होती है।


दक्षिण दिशा में यात्रा न करें क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा है अर्थात इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा हानिकारक है।


घनिष्ठा नक्षत्र में ईंधन इकट्ठा न करें अर्थात गैस सिलेंडर या पेट्रोल या केरोसीन न खरीदें इससे अग्नि का भय रहता है।


पंचक के दौरान चारपाई न बनवाएं, पलंग और फर्नीचर भी न खरीदें।


रेवती नक्षत्र में घर की छत डालना धन हानि और क्लेश कराने वाला होता है।


पंचक के पांच नक्षत्रों में से धनिष्ठा व शतभिषा चर संज्ञक हैं अत: इसमें पर्यटन, मनोरंजन, मार्केटिंग व वस्त्रभूषण खरीदना शुभ है। पूर्वाभाद्रपद उग्र संज्ञक नक्षत्र है अत: इसमें वाद-विवाद व मुकदमें जैसे कामों को करना शुभ है। उत्तरा-भाद्रपद ध्रुव संज्ञक नक्षत्र है। इसमें शिलान्यास, योगाभ्यास व दीर्घकालीन योजनाओं को प्रारम्भ शुभ है। रेवती नक्षत्र मृदु संज्ञक नक्षत्र है अत: इसमें गीत, संगीत, अभिनय, टी.वी. सीरियल का निर्माण एवं फैशन शो आयोजित किये जा सकते हैं। अगर इन पांच वर्जित कार्यों को पंचक के दौरान करना ही पड़ जाए जाए तो निम्नलिखित उपाय करके उन्हें सम्पन्न करें।


पंचक के उपाय
पंचक में अगर ईंधन इकट्ठा करना ज़रूरी हो तो आटे से बना तेल का पंचमुखी दीपक शिवालय में जलाएं उसके बाद ईंधन खरीदें।


पंचक काल में अगर दक्षिण दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो तो हनुमान मंदिर में पांच फल चढ़ा कर यात्रा कर सकते हैं।


अगर शादी के लिए लकड़ी का समान खरीदना जरूरी हो तो गायत्री हवन करवाकर लकड़ी का फर्नीचर खरीद सकते हैं।


शवदाह आवश्यक कार्य है परंतु पंचक होने पर शवदाह के समय पांच अलग पुतले बनाकर उन्हें भी अवश्य जलाएं।


मकान पर छत डलवाना अगर जरूरी हो तो मजदूरों को मिठाई खिलाने के पश्चात ही छत डलवाने का कार्य करें। 


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

 




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