जिनमें हो एेसे गुण वे ही पाते हैं जीवन में संतुष्टि

Friday, June 2, 2017 5:31 PM
जिनमें हो एेसे गुण वे ही पाते हैं जीवन में संतुष्टि

समय हमेशा बहता रहता है। कोई शक्ति उसे रोक नहीं सकती। समय की धारा में बहते हुए हम इतना कर सकते हैं कि उसका सदुपयोग करें। उसे अपने लिए अर्थपूर्ण बनाएं। जीवन को सार्थक बनाने से आशय यही है कि हमें संतुष्टि मिले। हमें जीवन की सार्थकता के लिए प्रयास करना ही चाहिए।

कुछ लोग अगर दूसरों को सताने, उनके साथ धोखा करने और उन्हें परेशान करने में ही समय लगाते हैं। इससे उन्हें तात्कालिक राहत तो मिल सकती है लेकिन लंबे समय में मन पर एक बोझ रहता है। उनके जीवन में कभी संतुष्टि का भाव नहीं आ सकता। इसलिए अपने समय को उन कार्यों में लगाना चाहिए जो आपको सच्ची संतुष्टि देते हैं। पैसे से आपके जीवन में संतुष्टि नहीं आ सकती है। जब आप पैसे के पीछे जाते हैं तो और-और ही करते रहते हैं। मगर जब आप अपने जीवन में करुणा जगाते हैं तो संतुष्टि और प्रसन्नता प्राप्त होती है। जीवन की सार्थकता का एहसास होता है। हमारा लक्ष्य इस संतुष्टि को पाने का ही होना चाहिए। पीड़ा और आनंद सभी जीव-जंतु समान रूप से महसूस करते हैं। यहां तक कि वृक्ष भी संवेदना व्यक्त करते हैं लेकिन मनुष्य के पास बुद्धि (विवेक) है जो उसे दूसरों से अलग करती है। चूंकि हमारे पास विवेक है तो हमारी प्रसन्नता भी बड़ी होनी चाहिए लेकिन विवेक हमारी बहुत-सी समस्याओं का कारण बन गया है। बुद्धि ही आज मनुष्य के तनाव की वजह बन गई है।

पढ़े-लिखे लोग ज्यादा तनाव में रहते हैं क्योंकि वे अपेक्षाओं और डर के साथ जीवन जीते हैं। इनकी वजह से उनके सिर पर चिंताएं रहती हैं। जानवरों की सोच तात्कालिक होती है लेकिन हम सिर्फ अपने ही जीवन के बारे में नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बारे में सोचने लगते हैं। यहीं हम जीवन में चिंता के लिए जगह बना लेते हैं।

आजकल कुछ वैज्ञानिक खोजें बताती हैं कि अगर नियमित डर, गुस्सा और नफरत आपके दिमाग में बनी रहती है तो वह शरीर का बहुत नुक्सान करती है। शांत मस्तिष्क सबसे ज्यादा जरूरी है। ईमानदार और सच्चे लोग ही विश्वास जीतते हैं और उनके साथ मित्रता लंबी चलती है। भले ही आप विश्वास करें या न करें ऐसे लोग ही संतुष्टि पाते हैं।
 



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