100 वर्ष या उससे भी अधिक उम्र आज भी भोगी जा सकती है, जानते हैं कैसे

Wednesday, June 14, 2017 10:21 AM
100 वर्ष या उससे भी अधिक उम्र आज भी भोगी जा सकती है, जानते हैं कैसे

प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है, मानव कितनी लंबी आयु भोगता था। समय जैसे-जैसे पंख लगाकर उड़ रहा है, वैसे-वैसे मनुष्य की उम्र भी कम होती जा रही है। क्या आप जानते हैं इसका कारण क्या है? 100 वर्ष या उससे भी अधिक उम्र आज भी भोगी जा सकती है, जानते हैं कैसे? इन दोनों प्रश्नों का उत्तर छिपा है महाभारत के अनुशासन पर्व में, जिसमें भीष्म पितामाह ने युधिष्ठिर को बताई हैं ये बातें


100 वर्ष की आयु भोगते हैं ये लोग
सदा सच बोलने वाले।

क्रोध न करने वाले।

जिसकी नजर में सभी जीव एक समान हों।

धोखा न देने वाले

ईमानदारी से जीवन निर्वाह करने वाले।

जो लोग सुबह 9 बजे से पहले  दांत-मुंह धोकर, बाल संवार कर, आंखों में काजल लगाकर देवताओं का पूजन करते हैं वह काल का ग्रास नहीं बनते।

तारों की छांव में उठकर शौच-स्नान करके सूर्योदय और सूर्यास्त के समय ईश अराधना करने वाला लंबी उम्र भोगता है।

बिना कपड़ों के अथवा रात को स्नान न करने वाला।

उत्तर दिशा की ओर मुंह करके मल-मूत्र त्याग करने वाला।

अपवित्र अवस्था में सूर्य और चंद्रमा को न देखने वाला। 

परोसे हुए भोजन की निंदा न करने वाला।

भीगे पैर भोजन करने वाले।

जूठे मुंह घर से बाहर न निकलने वाला।

गुरु निंदा न करने वाला।

भोजन की थाली दूसरे के साथ शेयर न करने वाला।

हाथ में नमक लेकर न खाने वाला।

रात को दही और सत्तू न खाने वाला।

हजामत बनवाकर नहाने वाला।
 

ये काम करने से कम उम्र में होती है मृत्यु
तिनके तोड़ना, नाखून चबाना और सदा अशुद्ध अवस्था में बने रहने वाला अल्प आयु भोगता है।

सूरज को उदय, अस्त, ग्रहण एवं दिन के समय निहारने वाला। 

नास्तिक

आलसी

गुरु और शास्त्रों का आदर न करने वाला।

अधर्म के पथ पर चलने वाला।

सूर्योदय के बाद सोने वाला।

अपनी जाति को छोड़ कर किसी अन्य महिला से संबेध बनाने वाले।

मल-मूत्र को देखने वाले।

पैर पर पैर रखने वाले

कृष्ण व शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, अष्टमी, अमावस्या और पूर्णिमा तिथि पर स्त्री संग करने वाला।

गंदे आईने में स्वयं को निहारने वाला।

गर्भवती स्त्री से संग करने वाला।

उत्तर और पश्चिम दिशा में सिर करके सोने वाला।

टूटी अथवा ढीली खाट पर सोने वाला।

अंधेरे में रखे पलंग पर सोने वाले।

दूसरों के कपड़े व जूते पहनने वाला। 

निंदा-चुगली करने वाला। 

दूसरों का अपमान करने वाला। 

अपंग व कुरूप का मजाक उड़ाने वाला। 

अपवित्र अवस्था में सोने वाला।

सिर पर तेल लगाकर, दूसरे अंगों को हाथ लगाने वाला। 

जूठे मुंह पढ़ने अथवा पढ़ाने वाला।



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