चाणक्य नीति:विद्यार्थियों को इन बातों से बनाकर रखनी चाहिए दूरी, मिलेगी सफलता

Friday, January 27, 2017 9:52 AM
चाणक्य नीति:विद्यार्थियों को इन बातों से बनाकर रखनी चाहिए दूरी, मिलेगी सफलता

जीवन को सही दिशा देने के लिए शिक्षा बहुत जरुरी है।अच्छी शिक्षा ही अच्छा भविष्य बना सकती है। इसी वजह से पढ़ाई के दिनों में छात्र-छात्राओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इन दिनों में यदि कोई विद्यार्थी रास्ता भटक जाता है तो उसका पूरा जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। चाणक्य ने ऐसी बातों के बारे में बताया है जिनसे दूरी बनाकर विद्यार्थी को शिक्षा प्राप्त करने में सफलता मिल सकती है। 

 

कामक्रोधौ तथा लोभं स्वायु श्रृड्गारकौतुरके।
अतिनिद्रातिसेवे च विद्यार्थी ह्मष्ट वर्जयेत्।।

 

चाणक्य के अनुसार जिन विद्यार्थियों का मन साज-श्रृंगार में लगा होता है, वे पढ़ाई में कम ही ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। उनके दिमाग में सौंदर्य, पहरावे अौर रहन-सहन की ही बातें चलती रहती हैं। इसलिए जिन विद्यार्थियों के मन में साज-श्रृंगार की बातें चलती रहती है उनका ध्यान अध्ययन में कम ही लगता है। 

 

जिनकी जीभ वश में नहीं होती वे हर समय स्वादिष्ट भोजन की ही खोज करते रहते हैं। स्वाद के चक्कर में वे अपने स्वास्थ्य से भी समझौता कर बैठते हैं। विद्यार्थियों को स्वादिष्ट भोजन का ध्यान छोड़ स्वास्थ्य अौर पढ़ाई की अोर ध्यान देना चाहिए। 

 

विद्यार्थियों को अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर कम अौर पढ़ाई पर अधिक ध्यान देना चाहिए। कई बार पढ़ाई करते समय थकान का भी सामना करना पड़ता है लेकिन विद्यार्थियों को शरीर की सेवा से अधिक अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए। 

 

जिन विद्यार्थियों को नींद अधिक प्रिय होती है, उनका ध्यान भी पढ़ाई में कम ही लगता है। ऐसे विद्यार्थी के मन में हर समय नींद ही घूमती रहती है। जिसके कारण वह अच्छे से कार्य नहीं कर पाता। ऐसे विद्यार्थी उतना ही ज्ञान प्राप्त करते हैं जितना आवश्यक हो। जबकि पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति के लिए विद्यार्थियों को अत्यधिक नींद का त्याग करना चाहिए। 

 

विद्यार्थी जीवन में गंभीरता सबसे महत्वपूर्ण गुण होता है। विद्यार्थी इस गुण को अपना कर ही अच्छे से शिक्षा अौर सफलता प्राप्त कर सकता है। जो विद्यार्थी सारा समय हंसी-मजाक में व्यर्थ कर देता है, उसे कभी सफलता नहीं मिलती।

 

जो विद्यार्थी काम भावना से ग्रसित होते हैं, उनका ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता। वे पढ़ाई को छोड़ अन्य कार्यों की अोंर आकर्षित होने लगते हैं। जिसके कारण वे पढ़ाई से दूर होते चले जाते हैं। इसलिए विद्याथियों को इन बातों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। तभी जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। 

 

क्रोध से किसी का भी मन शांत नहीं होता। जबकि विद्या प्राप्ति के लिए विद्यार्थी का मन शांत अौर एकचित्त होना चाहिए। अशांत मन से विद्यार्थी ज्ञान को केवल सुनता है, उसे समझ कर उसका पालन नहीं कर पाता। इसलिए क्रेध नहीं करना चाहिए। 

 

लालच करना बुरी आदत है। लालच करने वाला व्यक्ति हर समय दूसरों से वस्तु पाने के बारे में सोचता रहता है। ऐसा विद्यार्थी कभी भी विद्या के बारे में सतर्क नहीं रहता। वह अपना सारा समय अपने लालच को पूरा करने में ही व्यर्थ कर देता है। 
 




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