तप-भूमि दो भागों में बंट गई, बाबा बाजो जी सशरीर धरती में समा गए

Wednesday, May 31, 2017 1:44 PM
तप-भूमि दो भागों में बंट गई, बाबा बाजो जी सशरीर धरती में समा गए

देवों के देव महादेव भगवान शंकर जी की अंशकाल तपोस्थली हाजीपुर से 2 किलोमीटर दूर शिवालिक पर्वत माला पर 233 वर्ष प्राचीन देव स्थल अमर विभूति बाबा बाजो मंदिर गांव सवार उत्तरी भारत के भक्तजनों का आस्था का केन्द्र है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 521 मीटर ऊंची पहाड़ी पर विराजमान है। यहां का प्राकृतिक दृश्य अति सुंदर, रमणीक, मनोहारी, आलौकिक तथा दिव्य ऊर्जा प्रदान करने वाला है। इस मंदिर के प्रति अनेक किंवदंतियां आज भी सुनने को मिलती हैं। मंदिर प्रबंधक समिति के सदस्यों के अनुसार दरबार की पूर्व दिशा में लगभग आधा किलोमीटर दूर एक अन्य ‘मनि’ नामक ऊंची पहाड़ी है यहां बाबा बाजो जी ने घोर तपस्या की थी और दीन-दुखियों, असहाय जनों का कल्याण किया था। अपनी योग माया के माध्यम से वे प्रतिदिन गंगा स्नान के लिए जाते थे। उनके जप-तप की चर्चा क्षेत्र की चारों दिशाओं में होने लगी। 


जन कल्याण करते हुए बाबा जी एक दिन तपस्या की मुद्रा में ध्यान लगाए हुए थे तभी आकाश मंडल में बिजली की गर्जना हुई तो तप-भूमि दो भागों में बंट गई और बाबा बाजो जी सशरीर धरती में समा गए। 


उनके ज्योति-जोत समाने के पश्चात ‘मणि’ नामक स्थान व बाबा बाजो मंदिर सवार में असंख्य भक्तों का तांता लगता आ रहा है। बाबा जी सभी की मनोकामना, मनोरथ पूरे करते हैं। प्रात: व सायंकाल प्रतिदिन हरिकीर्तन, आरती होती है।


यहां सनातन मर्यादा के अनुसार सभी धार्मिक पर्व वैदिक परम्परा से मनाए जाते हैं। मुख्य समागम 25 व 26 जनवरी को ‘मणि’ नामक स्थान पर तथा 4 दिवसीय आयोजन गांव सवार में 30 मई से 2 जून तक होता है, जिसमें श्री राम चरित मानस का अखंड पाठ, हवन यज्ञ, कन्या पूजन, बाबा जी की प्रतिभा का अभिषेक, मुख्य ध्वज पताका आरोहण, सत्संग, प्रवचन, अरदास एवं बाबा जी को लगाए भोग का प्रसाद भंडारा आदि वितरित होता है।
 




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