सरकार के लिए सिर दर्द बना आयातित दालों का बफर स्टॉक

Tuesday, May 2, 2017 1:54 PM
सरकार के लिए सिर दर्द बना आयातित दालों का बफर स्टॉक

नई दिल्लीः पिछले कई सालों से उपभोक्ताओं के साथ सरकार के लिए दालें सिरदर्द बन गई हैं। दालों की आसमान छूती कीमतें आम लोगों को परेशान करती रही हैं। वहीं, बफर स्टॉक बनाने का फैसला सरकारी खजाने पर अब भारी पड़ने लगा है। राज्यों के असहयोग के चलते केंद्र की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इसी वजह से केंद्र सरकार ने राज्यों के सामने सस्ती से सस्ती दरों पर दालें बेचने की पेशकश की है।

दरअसल, बफर स्टॉक में आयात की हुई दालें खराब होने के कगार पर पहुंच गई हैं। दलहन फसलों का भंडारण एक समय तक ही किया जा सकता है। उसके बाद उनके खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। बफर स्टॉक में फिलहाल लगभग चार लाख टन आयातित दालें पड़ी हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा डेढ़ लाख टन से अधिक अरहर दाल है, जबकि बाकी मसूर, चना और उड़द की दालें हैं।

सूत्रों के मुताबिक अपने बफर स्टॉक में पड़ी-पड़ी दालें खराब होने के मद्देनजर खाद्य मंत्रलय उन्हें राज्यों को बेचना चाहता है। मगर राज्यों ने आयातित दालों की खरीद में कोई रुचि नहीं दिखाई है। बफर स्टॉक में कुल 19.91 लाख टन दालों की खरीद हो चुकी है। लेकिन इसमें से केवल 1.31 लाख टन दालें ही बेची जा सकी हैं। बाकी दालों के खरीदार नहीं हैं।

सरकार इन दालों को हर हाल में जैसे तैसे बेचकर फारिग होना चाहती है। इसके लिए मई के दूसरे सप्ताह में दालों की नीलामी किए जाने की संभावना है। इसमें न्यूनतम मूल्य निर्धारित किए जा सकते हैं। इसके ऊपर बोली लगाने वाले राज्यों को दालें बेची जा सकती हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इन दालों को बेचने के लिए कई तरह की रियायतों की घोषणा की जा सकती है।

इनमें दालों की खरीद करने वाले राज्यों को 5 फीसदी की कैश बैक योजना का लाभ दिया जा सकता है। दालों की सरकारी बिक्री के नियमों को सरल बनाया जाएगा। नैफेड के मार्फत केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए दालों की आपूर्ति की जाएगी। प्रतिरक्षा और पैरामिलिट्री कैंटीनों को भी दालों की सप्लाई का प्रस्ताव है।



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