भारत में बढ़ रहा है ग्रीन ट्रेंड: कैसे एवोकाडो बन रहा है नया फूड ट्रेंड
punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 03:17 PM (IST)
नई दिल्ली: हरा रंग लंबे समय से हेल्दी ईटिंग की पहचान का एक जाना पहचाना हिस्सा रहा है, चाहे वह हरी पत्तेदार सब्जियां और जड़ी बूटियां हों या ताजी उपज। अब यह जुड़ाव एक नए रूप में सामने आ रहा है, क्योंकि भारत की बदलती फूड कल्चर में एवोकाडो उन सामग्रियों में शामिल हो रहा है जिन पर लगातार ध्यान बढ़ रहा है। कभी मुख्य रूप से एक प्रीमियम या सीमित रूप से उपलब्ध आयातित फल के तौर पर देखा जाने वाला एवोकाडो अब धीरे धीरे रेस्टोरेंट के मेन्यू, ग्रॉसरी लिस्ट और घरों की रसोई तक पहुंच रहा है। वर्ल्ड एवोकाडो ऑर्गनाइज़ेशन (WAO) भी इस फल में बढ़ती वैश्विक रुचि को रेखांकित कर रहा है।
एवोकाडो ट्रेंड को खास बनाने वाली बात यह है कि इसे केवल दोहराया नहीं जा रहा, बल्कि नए अंदाज में अपनाया जा रहा है। इसे सिर्फ पारंपरिक एवोकाडो टोस्ट तक सीमित रखने के बजाय अब रैप्स, सैंडविच, सलाद, डिप्स, बाउल्स और आधुनिक भारतीय अंदाज की रेसिपीज में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। शेफ और होम कुक्स इसे तेजी से एक बेस सामग्री के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जो रोजमर्रा के व्यंजनों को अलग टेक्सचर और खास अंदाज दे सकती है। यह बदलाव उपभोक्ताओं के बदलते व्यवहार की ओर भी इशारा करता है। लोग अब ग्रॉसरी की खरीदारी में अधिक प्रयोग कर रहे हैं और अक्सर रेस्टोरेंट, फूड क्रिएटर्स और ऑनलाइन रेसिपीज के जरिए अनजान या नई सामग्रियों से परिचित होने के बाद उन्हें अपनी रसोई में शामिल करते हैं।
एवोकाडो इस तरह की खोज आधारित फूड कल्चर में आसानी से फिट होता है, जहां नई सामग्री तेजी से रोजमर्रा के खाने के प्रयोग का हिस्सा बन सकती है। एवोकाडो का बढ़ता चलन यह भी दिखाता है कि भारतीय फूड बिजनेस अंतरराष्ट्रीय फूड ट्रेंड्स को केवल दोहरा नहीं रहे, बल्कि उन्हें अपने हिसाब से ढाल रहे हैं। किसी ग्लोबल सामग्री को अब स्थानीय संदर्भ दिया जा सकता है और उसे परिचित फॉर्मेट्स के साथ साथ नए तरह के पाक प्रयोगों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए बड़ी कहानी केवल एवोकाडो तक सीमित नहीं है। इसकी बढ़ती मौजूदगी यह दिखाती है कि भारत में खाने के विकल्प अब अधिक प्रयोगात्मक और सामग्री केंद्रित होते जा रहे हैं। यह हरा फल भले ही एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड के रूप में भारत आया हो, लेकिन इसकी अगली कहानी भारतीय रसोई से लिखी जा सकती है।
