Air India को झटका! पड़ा ₹1.5 लाख का जुर्माना, जानें पूरा मामला
punjabkesari.in Tuesday, Jan 20, 2026 - 10:11 PM (IST)
पंजाब डेस्क: दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग–VI ने एयर इंडिया को एक यात्री और उसकी बेटी को कुल ₹1.5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला एक लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान खराब सेवाओं को लेकर आया है।
मामला शैलेन्द्र भटनागर और उनकी बेटी से जुड़ा है। दोनों ने सितंबर 2023 में एयर इंडिया की दिल्ली–न्यूयॉर्क–दिल्ली फ्लाइट से यात्रा की थी। उन्होंने मेकमायट्रिप के जरिए इकोनॉमी क्लास के टिकट बुक किए थे।
यात्रियों ने शिकायत की कि उड़ान के दौरान उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। विमान की सीटें टूटी हुई और बहुत असहज थीं। इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम काम नहीं कर रहा था। सीट के बटन और कॉल बटन भी खराब थे। इसके अलावा, टॉयलेट गंदे थे और उनमें बदबू आ रही थी। यात्रियों का कहना था कि खाने-पीने की गुणवत्ता भी बहुत खराब थी।
सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी केबिन क्रू ने कोई उचित मदद नहीं की। इससे यात्रियों को काफी मानसिक तनाव और असुविधा हुई। उपभोक्ता आयोग ने माना कि यात्रियों से भारी किराया लिया गया था, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं दी गई। आयोग की अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चंद्रा ने कहा कि यह सेवा में स्पष्ट कमी है और यात्रियों को मुआवजा मिलना चाहिए।
आयोग ने एयर इंडिया को पिता और बेटी को ₹50,000-₹50,000 मुआवजे के तौर पर देने और ₹50,000 मुकदमे के खर्च के रूप में चुकाने का आदेश दिया। हालांकि, टिकट की पूरी रकम वापस करने की मांग को खारिज कर दिया गया, क्योंकि यात्रियों ने अपनी यात्रा पूरी कर ली थी।
एयर इंडिया ने अपने बचाव में कहा कि उड़ान से पहले विमान की सभी तकनीकी जांच पूरी की गई थी और यात्रियों को पूरी मदद दी गई। एयरलाइन ने यह भी दावा किया कि यात्रियों ने बिजनेस क्लास में अपग्रेड की मांग की थी, जो सीट न होने के कारण पूरी नहीं हो सकी।
लेकिन आयोग ने एयर इंडिया की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि यात्रियों ने टूटी सीटों की तस्वीरें सबूत के रूप में दी थीं और एयर इंडिया को कानूनी नोटिस भी भेजा गया था, जिसका कोई जवाब नहीं दिया गया।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत एयरलाइन एक सेवा प्रदाता है और टिकट खरीदने वाला यात्री उपभोक्ता होता है। अगर जरूरी सुविधाएं नहीं दी जातीं, तो इसे सेवा में कमी माना जाएगा।
इस मामले में मेकमायट्रिप को भी पक्षकार बनाया गया था, लेकिन आयोग ने उसके खिलाफ सभी आरोप खारिज कर दिए। आयोग ने कहा कि मेकमायट्रिप की भूमिका सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित थी। यह फैसला यात्रियों के अधिकारों के लिए अहम माना जा रहा है और यह संदेश देता है कि खराब सेवा देने पर एयरलाइंस को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here
