यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ वारंट जारी, साल 2018 के एक वीडियो को लेकर कोर्ट से आदेश जारी
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 12:38 PM (IST)
नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने 2018 के मानहानि मामले में यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला मई 2018 में राठी द्वारा जारी किए गए एक वीडियो से जुड़ा है। आरोप है कि इस वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल ने उन्हें बदनाम करने के लिए एक व्यक्ति को रिश्वत देने की कोशिश की थी। यह वीडियो राठी के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया गया था और बाद में अरविंद केजरीवाल ने इसे रीट्वीट किया था, जो उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री थे।
शिकायतकर्ता विकास संकृत्यायन (जिन्हें विकास पांडे के नाम से भी जाना जाता है) ने इस वीडियो और इसके प्रसार को लेकर राठी और केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इससे पहले 12 अक्टूबर को साकेत कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन ने राठी के लिए नए समन जारी करने का आदेश दिया। शिकायतकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि मामले की कार्यवाही शुरू होने के बाद से राठी को समन तामील कराने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन वे सभी असफल रहीं।
शिकायतकर्ता के वकील समक्ष शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राठी मुख्य रूप से विदेश में रहते हैं, इसलिए कई सालों तक उन्हें समन नहीं पहुंचाया जा सका। हालांकि कोर्ट को यह भी बताया गया कि राठी फिलहाल भारत में हैं और हरियाणा के गुरुग्राम में एक पते पर रह रहे हैं। मजिस्ट्रेट ने गौर किया कि राठी को पहली बार 23 जुलाई 2019 को समन भेजा गया था और शिकायतकर्ता तब से लगातार समन तामील कराने की कोशिश कर रहे हैं।
कोर्ट ने पांडे को समन तामील कराने वाले अधिकारी (प्रोसेस सर्वर) के साथ जाने की अनुमति दी और उन्हें दो दिनों के भीतर 'प्रोसेस फीस' जमा करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर 2026 के लिए तय की गई है। इसके अलावा राठी को साकेत कोर्ट में एक और मानहानि के मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला एक ऐसे वीडियो से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि भगवान राम और माता सीता ने अपने वनवास के दौरान मांस और शराब का सेवन किया था।
शिकायतकर्ताओं ने (जो खुद को हिंदू श्रद्धालु बताते हैं) आरोप लगाया है कि इस वीडियो से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने मुकदमे के लंबित रहने के दौरान गूगल को उस वीडियो (या उसी तरह की सामग्री वाले किसी अन्य वीडियो) को फिर से बहाल करने, होस्ट करने, अपलोड करने, साझा करने या प्रसारित करने से रोकने के लिए एक 'एक्स-पार्टे एड-इंटैरिम' (एकतरफा अंतरिम) निषेधाज्ञा की भी मांग की है। यह मांग URL की सूचना मिलने और उसके सत्यापन के बाद लागू होगी।
