Indian Railways: रेलवे पटरियों में क्यों नहीं लगता जंग? वजह जानकर चकरा जाएगा सिर, वैज्ञानिकों ने सालों पहले खोजा था ये तरीका
punjabkesari.in Friday, Feb 06, 2026 - 12:50 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे आज सिर्फ देश की लाइफलाइन ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक रेल नेटवर्क में से एक बन चुका है। आधुनिक ट्रेनों, बेहतर सुविधाओं और उन्नत तकनीक की वजह से भारतीय रेलवे यात्रियों के सफर को लगातार आसान और आरामदायक बना रहा है। यही कारण है कि जब विदेशी यात्री भारत में ट्रेन से सफर करते हैं, तो वे इसकी व्यवस्थाओं और इंजीनियरिंग को देखकर हैरान रह जाते हैं और अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। भारतीय रेलवे की पहचान केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी मजबूत और अनोखी इंजीनियरिंग भी इसे खास बनाती है। ट्रेन से सफर करते वक्त शायद ही किसी ने यह सोचा हो कि रेल की पटरियों में सालों तक जंग क्यों नहीं लगती, जबकि लोहे की दूसरी चीजों में जंग आम समस्या है।
दुर्गम इलाकों में भी मजबूत रेल नेटवर्क
भारतीय रेलवे पहाड़ों, रेगिस्तानों और दुर्गम इलाकों में भी बड़े पैमाने पर रेल परियोजनाएं तैयार कर रहा है। इन परियोजनाओं में हाई-स्पीड रेल, माल ढुलाई के विशेष कॉरिडोर और रणनीतिक रेल लाइनों का निर्माण शामिल है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण परियोजना उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक है, जो हिमालयी क्षेत्र से होकर गुजरती है। लगभग 272 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास दोनों के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। इस परियोजना का सबसे खास हिस्सा चिनाब रेल पुल है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। यह पुल नदी से करीब 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे तेज हवाओं व भूकंप जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह पुल भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग क्षमता का बड़ा उदाहरण माना जाता है।
ट्रेन की पटरियां इतनी मजबूत क्यों होती हैं
रेलवे ट्रैक की पटरियां आम लोहे से नहीं बनाई जातीं। इन्हें स्लीपर्स की मदद से मजबूती से बांधा जाता है, जिससे इन्हें आसानी से हटाया या चोरी करना संभव नहीं होता। इसके अलावा ये पटरियां विशेष स्टील मिश्र धातु से बनाई जाती हैं, जिन्हें काटना या नुकसान पहुंचाना बेहद मुश्किल होता है।
कैसे तैयार की जाती हैं रेल पटरियां
रेलवे ट्रैक आमतौर पर हाई क्वालिटी हॉट-रोल्ड स्टील से बनाए जाते हैं, जिनमें कार्बन और मैंगनीज का संतुलित मिश्रण होता है। इन पटरियों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वे भारी वजन, तेज रफ्तार और हर तरह की मौसम परिस्थितियों को सहन कर सकें। आमतौर पर ये पटरियां 52 किलो या 60 किलो प्रति मीटर वजन की होती हैं, जिससे उनकी मजबूती और टिकाऊपन बना रहता है।
रेल पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती
विशेषज्ञों के अनुसार, रेल पटरियों में जंग लगने के मामले बेहद कम होते हैं क्योंकि इन्हें खास स्टील मिश्र धातु से बनाया जाता है। इस स्टील में कार्बन और मैंगनीज की मात्रा ऐसी होती है कि ऑक्सीकरण की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। इसके अलावा ट्रेन के पहियों का लगातार दबाव और घर्षण पटरियों की सतह को पॉलिश करता रहता है, जिससे हल्की जंग अपने आप हट जाती है और गहरी जंग बनने का खतरा नहीं रहता। अगर पटरियां साधारण लोहे की बनी होतीं, तो नमी और मौसम की वजह से उन पर जल्दी जंग लग जाती। इससे न केवल पटरियों को बार-बार बदलने की जरूरत पड़ती, बल्कि रेल दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता। यही वजह है कि भारतीय रेलवे मजबूत और टिकाऊ स्टील का इस्तेमाल करता है, जिससे ट्रैक लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
